#देश दुनिया

NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, छात्रों की रिहाई के निर्देश; पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच के संकेत

NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है। कोर्ट ने आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रखने वाले हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई के निर्देश दिए हैं और पुलिस कार्रवाई के आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन स्वाभाविक, कोर्ट की अहम टिप्पणी

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन यदि किसी पक्ष की ओर से अधिकारों का उल्लंघन या अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है या अनावश्यक बल प्रयोग किया है, तो उसे भी कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। कोर्ट ने संकेत दिया कि विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के लिए एक समान राष्ट्रीय प्रोटोकॉल पर भी विचार किया जाना चाहिए।

हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि जिन छात्रों को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया है और जिनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए। साथ ही अदालत ने नाबालिग छात्रों के मामलों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार जांच जारी रह सकती है, लेकिन निर्दोष छात्रों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अदालत का मानना है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़नी चाहिए।

पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच पर कोर्ट का जोर

सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों पर गंभीर चिंता जताई। याचिकाओं में गंभीर चोटों, महिलाओं, वकीलों और मीडिया कर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन आरोपों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच का आधार बनता है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि यदि अदालत जांच के लिए किसी समिति का गठन करती है तो सरकार सहयोग करेगी।

हाई-पावर्ड कमेटी और सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति (हाई-पावर्ड कमेटी) गठित करने पर विचार कर सकता है। अदालत ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों से जुड़ा व्यक्तिगत डिजिटल डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है, जिसमें केंद्र, दिल्ली पुलिस और अन्य राज्यों से विस्तृत जवाब मांगा गया है।

https://x.com/stvnewsonline

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *