राजस्थान चुनाव से पहले सियासी संग्राम तेज, OBC आरक्षण बनेगा गेम चेंजर
राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही सियासी हलचल चरम पर पहुंच गई है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुके हैं और अपने-अपने स्तर पर जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं।
एक तरफ बीजेपी ने प्रदेश के सभी संभागों में चुनाव संचालन समितियों का गठन कर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंप दी है, तो वहीं कांग्रेस भी करीब 500 संभावित उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को चुनावी प्रबंधन का प्रशिक्षण देने की तैयारी में है। दोनों ही पार्टियां न केवल रणनीति बना रही हैं, बल्कि एक-दूसरे पर तीखे हमले कर माहौल को और गर्मा रही हैं।
इस पूरे चुनावी समीकरण में सबसे अहम भूमिका OBC आरक्षण निभाने वाला है। प्रदेश में करीब 76 लाख OBC परिवारों का सर्वे पूरा हो चुका है और 5 अगस्त तक इसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने की उम्मीद है। इसके बाद ही साफ होगा कि निकाय चुनाव में OBC वर्ग को कितनी सीटों पर आरक्षण मिलेगा, जो अधिकतम 21 प्रतिशत तक हो सकता है।
आरक्षण की अंतिम तस्वीर सामने आते ही वार्ड स्तर पर राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे। कई नेताओं की दावेदारी पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि टिकट वितरण अब पूरी तरह नए आरक्षण फॉर्मूले पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, तारीखों के ऐलान से पहले ही राजस्थान में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। अब सबकी नजर 5 अगस्त पर टिकी है, जहां से तय होगा कि किसकी रणनीति कितनी मजबूत और किसकी राह कितनी मुश्किल होने वाली है।
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