हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 3000 किमी बस संचालन अनिवार्य, 1 अगस्त से पालन न करने पर वेतन रोकने की छूट
जयपुर से बड़ी खबर सामने आई है, जहां राजस्थान हाईकोर्ट ने रोडवेज कर्मचारियों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2025 के उस परिपत्र को सही ठहराया है, जिसमें ड्राइवर और कंडक्टर के लिए हर महीने 3000 किलोमीटर बस संचालन अनिवार्य किया गया था।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि कर्मचारी अपने मूल दायित्व से बच नहीं सकते। यदि किसी कर्मचारी को वाहन संचालन से छूट चाहिए, तो उसे मेडिकल या विशेष कारणों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति लेनी होगी।
साथ ही, हाईकोर्ट ने रोडवेज को निर्देश दिए हैं कि जिन कर्मचारियों का वेतन रोका गया था, उसे चार सप्ताह के भीतर जारी किया जाए। लेकिन अब 1 अगस्त 2026 से यदि कोई कर्मचारी इस आदेश का पालन नहीं करता है, तो निगम को उसका वेतन रोकने की पूरी छूट होगी।
यह फैसला उस याचिका पर आया है, जिसे रोडवेज जॉइंट एम्प्लॉयज फेडरेशन ने दायर किया था। यूनियन का कहना था कि कई कर्मचारी लंबे समय से कार्यालयी कार्य कर रहे हैं, ऐसे में उनसे 3000 किलोमीटर बस संचालन कराना व्यावहारिक नहीं है।
वहीं, रोडवेज ने कोर्ट में दलील दी कि बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यालयी और ग्राउंड ड्यूटी में लगे होने से बस संचालन प्रभावित हो रहा था, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही थी। निगम ने भरोसा दिलाया कि जो कर्मचारी बस चलाएंगे, उनसे अन्य ड्यूटी नहीं कराई जाएगी।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अधिक कर्मचारियों के ऑफिस कार्य में लगे रहने से बाकी स्टाफ पर काम का दबाव बढ़ता है, जिससे थकान और सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए यह आदेश न तो मनमाना है और न ही अव्यावहारिक।
कुल मिलाकर, अब रोडवेज कर्मचारियों को अपने मूल कार्य पर लौटना होगा, वरना 1 अगस्त से वेतन रुक सकता है।
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