असम बाढ़ पर इजरायल ने जताई एकजुटता, कहा- इस कठिन समय में भारत के साथ हैं
असम में भीषण बाढ़ से उत्पन्न मानवीय संकट के बीच इजरायल ने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। भारत में इजरायल के दूतावास ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर कहा कि इस कठिन समय में वह असम और भारत के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। वहीं, राज्य में राहत और बचाव कार्य तेज़ी से जारी हैं तथा विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रभावित परिवारों के प्रति समर्थन जताया है।
इजरायल ने जताई संवेदना और एकजुटता
भारत में इजरायल के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक संदेश में असम की बाढ़ से प्रभावित परिवारों और समुदायों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। दूतावास ने कहा कि इजरायल इस कठिन समय में भारत और असम के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है तथा सभी प्रभावित लोगों की सुरक्षा, साहस और शीघ्र सामान्य जीवन की कामना करता है। यह संदेश ऐसे समय आया है जब असम के कई हिस्से बाढ़ की चपेट में हैं और बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित, राहत अभियान जारी
लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण असम के कई जिले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार लाखों लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), अग्निशमन एवं आपात सेवा तथा स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं। कई क्षेत्रों में सड़कें, पुल और तटबंध भी क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे राहत कार्यों में अतिरिक्त चुनौतियां सामने आ रही हैं।
बिजली और बुनियादी सेवाएं बहाल करने पर जोर
Himanta Biswa Sarma ने कहा है कि जिन इलाकों में बाढ़ का पानी घट रहा है, वहां चरणबद्ध तरीके से बिजली आपूर्ति बहाल की जा रही है। राज्य सरकार के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं को सामान्य करने और राहत सामग्री पहुंचाने का काम लगातार जारी है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त संसाधन भी तैनात किए जा रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने भी जताई चिंता
Mallikarjun Kharge और Rahul Gandhi ने भी असम के बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। खरगे ने राज्य में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए वैज्ञानिक आधार पर दीर्घकालिक रणनीति बनाने की मांग की। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय सहयोग देने की अपील भी की। राहुल गांधी ने बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता जताई।
स्थायी समाधान की मांग तेज
विशेषज्ञों का मानना है कि असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए केवल राहत कार्य पर्याप्त नहीं हैं। मजबूत तटबंध, आधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणाली, जल निकासी व्यवस्था में सुधार, आर्द्रभूमियों का संरक्षण और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे के विकास जैसे दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है। फिलहाल प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वासित करने पर है।