ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के विरोध में किसानों का बड़ा आंदोलन, ट्रैक्टर रैली के साथ चौमूं कूच
राजस्थान में प्रस्तावित किशनगढ़-कोटपूतली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और भरतपुर-ब्यावर भारतमाला परियोजना के विरोध में किसानों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। जयपुर जिले के रींगस-गोविंदगढ़ क्षेत्र से बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ सड़क पर उतर आए और चौमूं की ओर कूच किया। किसानों का कहना है कि इन परियोजनाओं से कृषि भूमि का व्यापक अधिग्रहण होगा, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। वहीं प्रशासन ने रैली को देखते हुए सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम किए हैं।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ चौमूं की ओर बढ़े किसान
किसान संगठनों के आह्वान पर सोमवार को रींगस और गोविंदगढ़ के बीच तातेड़ा मोड़ पर बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए। यहां से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला चौमूं की ओर रवाना हुआ। प्रदर्शनकारी अंजनी माता मंदिर के पास एकत्रित होकर उपखंड अधिकारी कार्यालय तक मार्च निकालने की तैयारी में जुटे। आंदोलन में आसपास के कई गांवों और विभिन्न जिलों से किसानों की भागीदारी रही। आयोजकों का दावा है कि सैकड़ों ट्रैक्टर इस रैली में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कही।
भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों की मुख्य आपत्ति
आंदोलन का मुख्य मुद्दा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और भारतमाला परियोजना के लिए होने वाला भूमि अधिग्रहण है। किसानों का कहना है कि उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण से खेती पर निर्भर हजारों परिवारों की आय प्रभावित होगी। उनका तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक और आर्थिक संरचना पर भी इसका असर पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि परियोजनाओं की समीक्षा कर ऐसे विकल्प तलाशे जाएं जिनसे विकास कार्य भी जारी रहें और किसानों के हितों की भी रक्षा हो सके। इसी मांग को लेकर सरकार से पुनर्विचार करने की अपील की गई है।
सरकार को भेजा ज्ञापन, खुली चर्चा की भी मांग
किसान महापंचायत के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर दोनों परियोजनाओं को वापस लेने की मांग दोहराई है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार इन परियोजनाओं को जनहित में मानती है तो इसके लाभ और प्रभाव पर सार्वजनिक स्तर पर खुली चर्चा कराई जाए। किसानों का आरोप है कि अब तक प्रभावित लोगों के साथ पर्याप्त संवाद नहीं हुआ है। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ किसानों की सहमति और उचित पुनर्वास भी उतना ही आवश्यक है, इसलिए सरकार को सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
इसे भी पढ़ें-CWG 2026: राजा मुथुपांडी का दमदार प्रदर्शन, वेटलिफ्टिंग में भारत को मिला सिल्वर
किसानों ने संवाद और राहत व्यवस्था पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की चिंताओं का समय पर समाधान नहीं किया गया। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में पारदर्शी प्रक्रिया और पर्याप्त मुआवजा सुनिश्चित होना चाहिए। किसानों ने यह भी मांग की कि जिन परिवारों पर परियोजनाओं का सीधा असर पड़ेगा, उनके पुनर्वास और आर्थिक सुरक्षा की स्पष्ट नीति बनाई जाए। उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर संतोषजनक समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन सतर्क, सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम
किसानों की रैली को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया और यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गईं। अधिकारियों ने प्रदर्शन शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि आम लोगों को न्यूनतम असुविधा हो। वहीं किसान संगठनों ने भी अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया है।