इंदौर के गौरव का महादान, अंगदान से चार लोगों को मिली नई जिंदगी
मध्य प्रदेश के इंदौर में मानवता और सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। 25 वर्षीय गौरव दवे के अंगदान से चार गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला। ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद उनके परिवार ने साहसिक निर्णय लेते हुए अंगदान की सहमति दी। अंगों को समय पर विभिन्न अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए शहर में 68वीं बार ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इस संवेदनशील पहल ने न केवल चार परिवारों की उम्मीदें लौटाईं, बल्कि समाज को अंगदान के महत्व का भी मजबूत संदेश दिया।
परिवार के फैसले ने बदल दी चार मरीजों की जिंदगी
खजूरी बाजार निवासी गौरव दवे को ब्रेन हेमरेज के बाद गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के लगातार प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उन्हें ब्रेन डेथ घोषित किया गया। इसके बाद परिवार ने गहरे दुख के बीच भी मानवता को प्राथमिकता देते हुए अंगदान का निर्णय लिया। परिवार के इस फैसले से चार अलग-अलग मरीजों को जीवनदान देने का रास्ता खुल गया और अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई।
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दिल, लिवर और दोनों किडनी का सफल प्रत्यारोपण
अंग आवंटन प्रक्रिया के तहत गौरव का हृदय अहमदाबाद के एक मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। उनका लिवर इंदौर के एक जरूरतमंद मरीज को लगाया गया, जबकि दोनों किडनियां दो अलग-अलग मरीजों के सफल प्रत्यारोपण के लिए भेजी गईं। विशेषज्ञ चिकित्सकों और ट्रांसप्लांट समन्वयकों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार संपन्न हुई। इससे चार मरीजों और उनके परिवारों को नई उम्मीद और नया जीवन मिला।
ग्रीन कॉरिडोर ने बचाया अनमोल समय
अंग प्रत्यारोपण में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी वजह से प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से दो विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किए गए। पहला कॉरिडोर अस्पताल से एयरपोर्ट तक बनाया गया, जिससे हृदय को निर्धारित समय में विमान तक पहुंचाया जा सका। दूसरा कॉरिडोर शहर के दूसरे अस्पताल तक अंग पहुंचाने के लिए बनाया गया। इस पूरी व्यवस्था में ट्रैफिक पुलिस की त्वरित और सुव्यवस्थित भूमिका अहम रही, जिससे अंग सुरक्षित और समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच सके।
फेफड़ों का प्रत्यारोपण नहीं हो सका
अंगदान प्रक्रिया के दौरान फेफड़ों का आवंटन भी किया गया था, लेकिन अंतिम समय में आवश्यक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण उनका प्रत्यारोपण संभव नहीं हो सका। इसके बावजूद अन्य प्रमुख अंगों का सफल प्रत्यारोपण किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था से ऐसे मामलों में और अधिक मरीजों को लाभ मिल सकेगा।
सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गौरव दवे को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अस्पताल परिसर में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने मानव श्रृंखला बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रशासन की ओर से भी सम्मान प्रकट किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने परिवार के साहस और संवेदनशील निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे फैसले समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और कई लोगों की जिंदगी बचाने की प्रेरणा देते हैं।