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फर्जी डिग्री रैकेट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: राजस्थान SOG की जांच को मिली नई रफ्तार

सरकारी भर्तियों में कथित फर्जी डिग्रियों के इस्तेमाल से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक अहम आदेश के बाद राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच को नई गति मिलने जा रही है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश और राजस्थान हाईकोर्ट के कुछ अंतरिम आदेशों पर रोक लगाते हुए जांच आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया है। इस फैसले के बाद दो विश्वविद्यालयों की भूमिका, कथित दलालों के नेटवर्क और सरकारी नौकरियों में संदिग्ध चयन की गहन जांच की जाएगी। मामला हजारों अभ्यर्थियों और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जांच का रास्ता साफ

राजस्थान SOG द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन अंतरिम राहत आदेशों पर रोक लगा दी, जिनके चलते जांच प्रभावित हो रही थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित पक्षों को पूर्व में मिली गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा सीमित अवधि तक ही प्रभावी थी। इसके साथ ही SOG को जांच आगे बढ़ाने की अनुमति मिल गई है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक जांच एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपनी कार्रवाई जारी रख सकेगी।

दो विश्वविद्यालयों की भूमिका जांच के दायरे में

SOG की जांच मध्य प्रदेश की श्री सत्य साई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज और उत्तराखंड की हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी से जारी कथित बैकडेटेड डिग्रियों पर केंद्रित है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, विशेष रूप से बीपीएड जैसी डिग्रियों का उपयोग राजस्थान की विभिन्न सरकारी भर्तियों में किया गया। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

भर्तियों में कथित फर्जी डिग्रियों के इस्तेमाल की जांच तेज

SOG के अनुसार अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और बड़ी संख्या में संदिग्ध अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान विश्वविद्यालय परिसर से कथित रूप से कई संदिग्ध डिग्रियां, मार्कशीट, मुहरें और डिजिटल रिकॉर्ड भी जब्त किए गए थे। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों का उपयोग किन-किन सरकारी भर्तियों में किया गया और इस पूरे नेटवर्क में किन लोगों की क्या भूमिका रही। जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

SOG का दावा, पूरे नेटवर्क से होगी पूछताछ

राजस्थान SOG के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) विशाल बंसल के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच का दायरा और व्यापक होगा। एजेंसी संबंधित विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक अधिकारियों, जिम्मेदार पदाधिकारियों तथा कथित बिचौलियों से पूछताछ करेगी। यदि जांच में किसी सरकारी कर्मचारी या अभ्यर्थी की भूमिका प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

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