बिहार बंद के दौरान कई जिलों में हिंसा, पुलिस-प्रदर्शनकारियों में झड़प; कई अधिकारी घायल
NEET-UG परीक्षा विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाए गए बिहार बंद के दौरान राज्य के कई हिस्सों में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। पटना समेत आठ जिलों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, पथराव और लाठीचार्ज की घटनाएं सामने आईं। कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि हालात को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
आठ जिलों में प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव
बिहार बंद के दौरान पटना, छपरा, सीवान, भागलपुर, औरंगाबाद, सीतामढ़ी, बेतिया और लखीसराय सहित कई जिलों में प्रदर्शन हुए। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस के अनुसार कुछ इलाकों में पथराव की घटनाएं हुईं, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए।
पटना के डाकबंगला चौराहे पर सबसे अधिक तनाव
राजधानी पटना में डाकबंगला चौराहा आंदोलन का मुख्य केंद्र बना रहा। बड़ी संख्या में छात्र और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता यहां एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। पुलिस का कहना है कि पथराव के बाद भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। घटना में एक पुलिस अधिकारी के घायल होने और एक सरकारी वाहन के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी सामने आई है।
सीवान में एसपी घायल, कई जगह पुलिस कार्रवाई
सीवान में प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक (एसपी) पूरन झा भी घायल हो गए। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से हुए पथराव में उन्हें चोट लगी। इसके बाद हालात पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। पुलिस के अनुसार स्थिति अधिक बिगड़ने पर चेतावनी स्वरूप फायरिंग भी की गई। वहीं छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी में भी झड़प, पथराव और पुलिस कार्रवाई की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई।
प्रशासन सतर्क, शांति बनाए रखने की अपील
लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों की जांच की जाएगी तथा कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों पर समाधान निकलने तक आंदोलन जारी रखने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।