लोकतंत्र की जीत, सरकार के अहंकार को झुकना पड़ा’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले अरविंद केजरीवाल
NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे देशव्यापी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आनी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस घटनाक्रम को देश की युवा शक्ति, जेन जी (Gen Z) और संपूर्ण लोकतंत्र की ऐतिहासिक विजय करार दिया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के संगठित और अटूट संघर्ष के कारण सरकार को अपना रुख बदलने पर मजबूर होना पड़ा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों में आम जनता का भरोसा पुनः सुदृढ़ हुआ है।
अरविंद केजरीवाल का बयान: ‘संघर्ष का फल मिला, सरकार को जनता के आगे झुकना पड़ा’
आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से देश के अभ्यर्थियों और युवाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर लंबे समय से चले आ रहे आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि जनतंत्र में वास्तविक शक्ति नागरिकों के हाथों में होती है। केजरीवाल के अनुसार, काफी समय से आम जनता में यह धारणा बन रही थी कि शासन व्यवस्था उनकी मांगों के प्रति उदासीन है, किंतु इस ऐतिहासिक निर्णय ने स्थापित कर दिया कि लोकतांत्रिक प्रणाली में जनाक्रोश और जायज मांगों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
NEET व्यवस्था में सुधार की मांग: पेपर लीक और मानसिक तनाव से मुक्ति की उम्मीद
शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर देते हुए अरविंद केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि इस निर्णय के बाद व्यवस्था में बुनियादी बदलाव होंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अब सम्पूर्ण NEET परीक्षा प्रणाली का पुनरीक्षण करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी तरह की धांधली और पेपर लीक की घटनाओं पर पूर्ण विराम लग सके। उन्होंने रेखांकित किया कि निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित होने से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच बढ़ता मानसिक तनाव दूर होगा और दुखद घटनाओं पर रोक लगेगी।
संजय सिंह का कड़ा प्रहार: ‘युवा शक्ति की जीत, कुंभकर्णी नींद से जागी सरकार’
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए छात्र शक्ति की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश भर के करोड़ों युवाओं ने अपने एकजुट आंदोलन के बल पर प्रशासनिक तंत्र को उसकी गहरी नींद से जगाने का काम किया है। संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह जवाबदेही तय करने और रोजगार की मांगों को प्रमुखता से उठाने की दिशा में एक नया मोड़ लेगा। उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी अभ्यर्थियों को इस बड़ी सफलता पर बधाई दी।
युवाओं का नया दौर: छात्र आंदोलनों से तय होगी राजनीतिक जवाबदेही
इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय राजनीति और जन-आंदोलनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों का मानना है कि युवाओं और विद्यार्थियों का यह संगठित प्रयास आने वाले समय में नीतिगत निर्णयों और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए एक मिसाल कायम करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय स्तर पर शिक्षा मंत्री का पद छोड़ना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर कठोरतम कदम उठाना और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना अनिवार्य हो जाएगा।