सोनम वांगचुक की पत्नी ने आलोचकों को दिया जवाब, बोलीं- ‘पहले 26 दिन का उपवास करके दिखाइए’
NEET पेपर लीक के विरोध में 26 दिन तक अनशन करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के फैसले पर सोशल मीडिया में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कुछ लोगों ने उनके अनशन समाप्त करने पर सवाल उठाए, वहीं उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. आंगमो ने आलोचकों को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि किसी के त्याग पर टिप्पणी करने से पहले उसके संघर्ष और परिस्थितियों को समझना चाहिए।
पत्नी गीतांजलि ने आलोचकों को दिया जवाब
डॉ. गीतांजलि जे. आंगमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक की आलोचना करने से पहले लोगों को खुद किसी बड़े उद्देश्य के लिए 26 दिनों तक उपवास करने का साहस दिखाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि किसी व्यक्ति के त्याग और निस्वार्थ सेवा पर टिप्पणी करने से पहले उसके संघर्ष का सम्मान करना जरूरी है। गीतांजलि ने लोगों से अपील की कि आलोचना से पहले संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।
‘आराम नहीं, त्याग का रास्ता चुना’
गीतांजलि ने अपने पोस्ट में कहा कि सोनम वांगचुक ने व्यक्तिगत सुविधा के बजाय समाज और छात्रों के मुद्दों को प्राथमिकता दी। उन्होंने बताया कि लंबे अनशन के दौरान उनका काफी वजन कम हुआ और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा। उनके अनुसार, वांगचुक वर्तमान में चिकित्सकीय देखरेख में हैं और ऐसे समय में उन्हें आलोचना नहीं बल्कि संवेदना और समर्थन की आवश्यकता है।
26 दिन बाद क्यों खत्म किया अनशन?
सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक चले अनशन को केंद्रीय मंत्रियों और अन्य प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के बाद समाप्त किया। उनके अनुसार, विभिन्न राजनीतिक दलों के कई सांसदों ने भी स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की थी। वांगचुक ने कहा कि बातचीत के दौरान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर आगे चर्चा का भरोसा दिया गया, जिसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
अनशन समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने कहा कि आंदोलन की सभी मांगें पूरी होने से पहले अनशन समाप्त नहीं होना चाहिए था। वहीं बड़ी संख्या में समर्थकों ने वांगचुक के 26 दिन के उपवास, छात्रों के समर्थन और उनके संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य को देखते हुए लिया गया फैसला व्यावहारिक था।
स्वास्थ्य पर दिया गया जोर
गीतांजलि आंगमो ने अपने संदेश में कहा कि किसी भी सामाजिक आंदोलन में मानव जीवन सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी के संघर्ष का मूल्यांकन करने से पहले उसके त्याग और स्वास्थ्य की स्थिति को समझें। उन्होंने कहा कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत हमलों और असंवेदनशील टिप्पणियों से बचना चाहिए।