गहलोत के आरोपों पर शेखावत का पलटवार, बोले- विपक्ष में बैठने से गुमराह करने का अधिकार नहीं मिलता
नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आरोपों का जवाब दिया। शेखावत ने कहा कि विपक्ष में होने का अर्थ तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और पेपर लीक पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानूनी कदम उठाए हैं।
पेपर लीक पर कांग्रेस के आरोपों का दिया जवाब
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका सरकार से सवाल पूछने की होती है, लेकिन तथ्यों के आधार पर बहस होना लोकतंत्र की आवश्यकता है। शेखावत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने शासनकाल की घटनाओं को नजरअंदाज कर वर्तमान सरकार पर आरोप लगाने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस शासन पर साधा निशाना
शेखावत ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में विभिन्न राज्यों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आए, जिससे लाखों अभ्यर्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, परीक्षाओं के रद्द होने से युवाओं को मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए हैं तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से कड़े प्रावधान लागू किए हैं।
पारदर्शी व्यवस्था और त्वरित न्याय पर दिया जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर नियंत्रण के लिए कानूनी व्यवस्था को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के माध्यम से मामलों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में भी पहल की गई है। शेखावत का कहना था कि युवाओं का विश्वास बनाए रखने के लिए परीक्षा प्रक्रिया का निष्पक्ष और पारदर्शी होना बेहद आवश्यक है।
विपक्ष से संवाद और सहयोग की अपील
शेखावत ने कहा कि यदि विपक्ष के पास किसी विषय पर आपत्ति या सुझाव है तो संसद लोकतांत्रिक चर्चा का सबसे उपयुक्त मंच है। उन्होंने आरोप लगाया कि बहस के बजाय हंगामे की राजनीति से समाधान नहीं निकलता। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से युवाओं के हितों को प्राथमिकता देते हुए परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए सकारात्मक सहयोग की अपील की। उनके अनुसार, युवाओं को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं बल्कि निष्पक्ष परीक्षाएं और समय पर न्याय चाहिए।
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