जोजरी नदी प्रदूषण मामला: सुप्रीम कोर्ट की राजस्थान सरकार को फटकार, एसआईटी की जांच पर भी उठाए सवाल
राजस्थान की जोजरी नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच की प्रगति पर भी असंतोष जताते हुए उसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्वतः संज्ञान से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अदालत ने कहा कि यदि प्रदूषण रोकने के लिए कठोर कदम उठाने पड़ें, तो जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अदालत की इन टिप्पणियों ने मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।
एसआईटी की जांच पर भी अदालत ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अदालत ने उपलब्ध रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि नदी में प्रदूषण की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है और जांच के परिणाम अपेक्षित स्तर के नहीं दिख रहे। कोर्ट ने संकेत दिया कि अब तक की जांच से संतोषजनक प्रगति परिलक्षित नहीं होती। अदालत ने इस मामले में प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई की आवश्यकता पर बल देते हुए अगली सुनवाई 4 अगस्त को तय की।
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राज्य सरकार ने कोर्ट में क्या रखा पक्ष
राजस्थान सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि एसआईटी का गठन हाल ही में किया गया है और उसने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट विशेषज्ञ समिति को सौंप दी है। सरकार की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की है तथा नमूना संग्रहण से जुड़े कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि विशेषज्ञ समिति के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई जारी है।
प्रदूषण नियंत्रण और उद्योगों पर निगरानी का दावा
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जोजरी नदी के किनारे संचालित उद्योगों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जिन औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषण फैलने की आशंका है, उनके संचालन और प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा की जा रही है। सरकार का कहना है कि जो उद्योग पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करेंगे, उनके संबंध में विशेषज्ञ समिति नियमानुसार निर्णय लेगी।
शोध में सामने आए नदी के पानी को लेकर गंभीर संकेत
हाल ही में जोधपुर स्थित जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) के एक अध्ययन में जोजरी नदी के पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर संकेत सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार नदी का जल गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर रहा और कई स्थानों पर सिंचाई के लिए भी उपयुक्त नहीं माना गया। शोधकर्ताओं ने औद्योगिक अपशिष्ट और बिना उपचार के छोड़े जा रहे प्रदूषित जल को प्रमुख कारणों में शामिल किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रभावी जल शोधन और प्रदूषण नियंत्रण उपाय समय रहते लागू नहीं किए गए तो आसपास के भूजल, कृषि, पशुधन और पर्यावरण पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
लंबे समय से चर्चा में है जोजरी नदी प्रदूषण का मुद्दा
जोजरी नदी नागौर जिले के पांडलू क्षेत्र की पहाड़ियों से निकलकर जोधपुर जिले में लूनी नदी से मिलती है। पिछले कई वर्षों से नदी में औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य प्रदूषित जल छोड़े जाने के आरोप लगते रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने समय-समय पर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद इस मामले में न्यायिक निगरानी जारी है और अब आगामी सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी।