कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे जयपुर के श्रद्धालु की मौत, 27 जुलाई को घर लौटने से पहले थम गईं सांसें
कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे जयपुर के 63 वर्षीय श्रद्धालु गौरीशंकर खंडेलवाल का उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में निधन हो गया। भारत लौटने के बाद उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। उन्हें तत्काल सेना के मेडिकल सेंटर ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना से उनके परिवार और यात्रा दल में शोक का माहौल है।
भारत लौटने के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, गौरीशंकर खंडेलवाल कैलाश मानसरोवर यात्रा के दूसरे दल का हिस्सा थे। मंगलवार सुबह दल के सदस्य लिपुलेख दर्रे के रास्ते भारत पहुंचे। इसी दौरान उन्हें अचानक सांस लेने में परेशानी होने लगी। यात्रा दल के सदस्यों और अधिकारियों ने तुरंत उन्हें नाभीढांग स्थित सेना के मेडिकल सेंटर पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन रास्ते में ही उनकी स्थिति गंभीर हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती स्तर पर मौत का कारण हृदयाघात (हार्ट अटैक) माना जा रहा है।
27 जुलाई को घर लौटने का था इंतजार
गौरीशंकर खंडेलवाल जयपुर के विद्याधर नगर क्षेत्र के निवासी थे। वे 4 जुलाई को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए घर से रवाना हुए थे। परिवार को उम्मीद थी कि वे 27 जुलाई को यात्रा पूरी कर सुरक्षित वापस लौटेंगे, लेकिन इससे पहले ही उनके निधन की सूचना मिल गई। खबर मिलते ही परिवार के सदस्य उत्तराखंड के लिए रवाना हो गए। प्रशासन के अनुसार उनका पार्थिव शरीर गुंजी से हेलीकॉप्टर के माध्यम से पिथौरागढ़ लाया गया, जहां आगे की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
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दो दिनों में यात्रा से जुड़ी दूसरी मौत
कैलाश मानसरोवर यात्रा के दूसरे दल में दो दिनों के भीतर यह दूसरी मृत्यु की घटना है। इससे पहले यात्रा दल के साथ कार्यरत कुमाऊं मंडल विकास निगम के एक कर्मचारी का भी चीन के गुंफू क्षेत्र में निधन हो गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उस मामले में भी हृदयाघात की आशंका जताई गई थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी बनती है चुनौती
कैलाश मानसरोवर यात्रा दुनिया की कठिन धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। यात्रा मार्ग समुद्र तल से 15 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहां ऑक्सीजन का स्तर सामान्य क्षेत्रों की तुलना में काफी कम होता है। ऐसी परिस्थितियों में कई यात्रियों को सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच कराना, पर्याप्त अनुकूलन (एक्लाइमेटाइजेशन) करना और किसी भी असुविधा पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद आवश्यक है।
यात्रा के अन्य दलों की आवाजाही जारी
कैलाश मानसरोवर यात्रा के तहत अब तक दो दल सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। तीसरा दल फिलहाल चीन में यात्रा पर है, जबकि चौथा दल तिब्बत के लिए रवाना हो चुका है। वहीं पांचवें दल की यात्रा फिलहाल तवाघाट क्षेत्र में अस्थायी रूप से रोक दी गई है, क्योंकि मार्ग पर बोल्डर गिरने से सड़क अवरुद्ध हो गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सड़क पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही अगले दल को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।