पेपर लीक पर खरगे का सरकार पर बड़ा हमला, बोले- ‘पहले आरोप लगते ही मंत्री इस्तीफा दे देते थे’
पेपर लीक विवाद और इससे जुड़े छात्र आंदोलन को लेकर देश की राजनीति लगातार गर्म बनी हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पहले सार्वजनिक जीवन में नैतिक जिम्मेदारी को महत्व दिया जाता था और गंभीर आरोप लगने पर मंत्री स्वयं पद छोड़ देते थे। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए आरोप लगाया कि सरकार न केवल जवाबदेही से बच रही है, बल्कि संसद में इस मुद्दे पर खुली चर्चा कराने से भी परहेज कर रही है।
‘पहले जवाबदेही होती थी, अब सरकार चुप क्यों है?’
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। उनके अनुसार, पहले किसी मंत्री पर गंभीर आरोप लगते ही नैतिक आधार पर इस्तीफा देना एक सामान्य राजनीतिक परंपरा मानी जाती थी। उन्होंने कहा कि आज लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा इतना बड़ा मामला सामने है, लेकिन सरकार जिम्मेदारी तय करने के बजाय पूरे विवाद को टालने की कोशिश कर रही है। खरगे ने सवाल उठाया कि यदि सरकार पूरी तरह आश्वस्त है कि सब कुछ सही हुआ है, तो फिर इस विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने से क्यों बच रही है।
पुराने इस्तीफों का उदाहरण देकर सरकार को घेरा
अपने बयान में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अतीत में कई मंत्रियों ने केवल नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर पद छोड़ दिए थे। उन्होंने वर्ष 2013 में तत्कालीन रेल मंत्री पवन कुमार बंसल के इस्तीफे का उदाहरण दिया, जिन्होंने रेलवे भर्ती रिश्वत मामले में विवाद बढ़ने के बाद पद छोड़ दिया था। इसके अलावा पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार का भी जिक्र किया, जिन्होंने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले से जुड़े विवाद के बाद इस्तीफा दिया था। खरगे ने महाराष्ट्र के एक पूर्व कानून मंत्री का भी उल्लेख किया, हालांकि उन्होंने उनका नाम नहीं लिया। उनका कहना था कि पहले राजनीतिक जवाबदेही को महत्व दिया जाता था।
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
खरगे ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने वाले छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया, कई छात्रों को हिरासत में लिया गया और आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए सख्ती दिखाई गई। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की प्राथमिकता संवाद होनी चाहिए, न कि दमनात्मक कार्रवाई। उनके अनुसार, छात्रों की चिंताओं को सुनना और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
संसद में चर्चा से बचने का लगाया आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार इस पर सहमति नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त तथ्य हैं तो उसे संसद में खुलकर चर्चा करनी चाहिए। खरगे का कहना है कि लोकतंत्र में संसद ही सबसे बड़ा मंच है, जहां सरकार और विपक्ष दोनों जनता के सामने अपना पक्ष रखते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा से बचना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर साधा निशाना
खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश में बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और युवाओं से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सरकार की प्रतिक्रिया अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि सत्ता में होने के नाते सरकार का दायित्व केवल बयान देना नहीं, बल्कि प्रभावी समाधान प्रस्तुत करना भी है। उनके अनुसार, यदि परीक्षा प्रणाली में लगातार सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को पारदर्शी जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
सरकार का पक्ष और आगे की राजनीतिक लड़ाई
दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। सरकार का दावा है कि छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम है। ऐसे में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर टकराव और तेज होने की संभावना है।