अजमेर दरगाह विवाद: कोर्ट में संशोधित परिवाद और नए साक्ष्य पेश, अगली सुनवाई 19 सितंबर को
अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह को लेकर चल रहे न्यायिक विवाद में बुधवार को अहम सुनवाई हुई। परिवादी पक्ष ने अदालत में संशोधित परिवाद दाखिल करते हुए कुछ नए दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर निर्धारित की है। फिलहाल अदालत ने इन दावों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है और मामला विचाराधीन है।
परिवादी पक्ष ने पेश किए नए दस्तावेज
परिवादी विष्णु गुप्ता की ओर से अदालत में संशोधित परिवाद दाखिल किया गया, जिसमें पहले से दर्ज दावों के साथ कुछ अतिरिक्त दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। इनमें एक ऐतिहासिक पुस्तक की प्रति और वर्ष 1842 की एक प्रशासनिक समिति से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए। परिवादी पक्ष का कहना है कि ये दस्तावेज उनके दावों का समर्थन करते हैं। हालांकि इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता और कानूनी स्वीकार्यता पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई के बाद ही होगा।
इसे भी पढ़ें – आबकारी घोटाले में रामगोपाल अग्रवाल की बढ़ीं मुश्किलें, 25 जुलाई तक EOW रिमांड मंजूर
दस्तावेजों के आधार पर रखे गए नए तर्क
सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कुछ नए तर्क अदालत के समक्ष रखे। इन तर्कों के आधार पर उन्होंने अपने पूर्व दावों को और मजबूत करने का प्रयास किया। दूसरी ओर, अदालत ने इन दावों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की और संबंधित पक्षों को नियमानुसार अपना जवाब प्रस्तुत करने का अवसर देने का निर्णय लिया। अब आगामी सुनवाई में इन दावों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।
अदालत ने अगली सुनवाई 19 सितंबर तय की
परिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि पहले अदालत दरगाह से जुड़े कुछ पक्षों को मामले में शामिल होने की अनुमति दे चुकी है। इसी क्रम में संशोधित परिवाद दाखिल किया गया है। अदालत ने अब अन्य पक्षकारों को जवाब दाखिल करने का समय देते हुए अगली सुनवाई 19 सितंबर तय की है। इस दौरान मामले से जुड़े सभी पक्ष अपने-अपने कानूनी तर्क और दस्तावेज अदालत के समक्ष रख सकेंगे।
सुनवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मामले की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए अदालत परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और कार्यवाही समाप्त होने के बाद भी परिवादी पक्ष को सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला गया। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।