MBA के बाद नौकरी नहीं मिली, साइबर ठगी की राह चुनी; बारां पुलिस ने तीसरे आरोपी को दबोचा
राजस्थान के बारां जिले में 18.93 लाख रुपए की ऑनलाइन एफडी ठगी के मामले में साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीसरे आरोपी को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मार्केटिंग में MBA करने के बावजूद रोजगार नहीं मिलने पर आरोपी साइबर अपराधियों के संपर्क में आया और इंजीनियर दोस्त के साथ मिलकर बैंक खाते व सिम कार्ड उपलब्ध कराने के नेटवर्क का हिस्सा बन गया। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
18.93 लाख की ऑनलाइन एफडी ठगी मामले में तीसरी गिरफ्तारी
बारां साइबर थाना पुलिस लंबे समय से ऑनलाइन एफडी तोड़कर 18.93 लाख रुपए की धोखाधड़ी के मामले की जांच कर रही थी। इसी क्रम में पुलिस ने मध्यप्रदेश निवासी विनोद सिंह को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इस प्रकरण में बैंक खाताधारक राजन साकेत और ई-मित्र संचालक श्रीकांत लखेर को गिरफ्तार किया जा चुका है। अदालत में पेशी के बाद विनोद सिंह को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है, ताकि उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। पुलिस का मानना है कि पूछताछ से साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
MBA के बाद नहीं मिली नौकरी, फिर अपराधियों से जुड़ गया आरोपी
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी ने मार्केटिंग में MBA की पढ़ाई की थी, लेकिन लंबे समय तक रोजगार नहीं मिलने के कारण वह आर्थिक संकट से जूझ रहा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात इंजीनियर श्रीकांत लखेर से हुई और दोनों साइबर अपराधियों के संपर्क में आ गए। आरोप है कि दोनों लोगों को पैसों का लालच देकर उनके बैंक खाते और मोबाइल सिम खरीदते थे तथा इन्हें साइबर ठगी करने वाले गिरोहों तक कमीशन के बदले पहुंचाते थे। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है।
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मुआवजे की रकम बनी साइबर ठगी का निशाना
पुलिस के अनुसार कवाई निवासी रमेशचंद्र धाकड़ को भूमि अधिग्रहण के मुआवजे के रूप में राशि मिली थी। उनकी पत्नी द्रोपती बाई के नाम वर्ष 2020 और 2024 में कुल 18 लाख रुपए की सावधि जमा (एफडी) कराई गई थी। बाद में साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए एफडी तोड़कर करीब 18.93 लाख रुपए निकाल लिए। बैंक पहुंचने पर घटना का पता चला, जिसके बाद पीड़िता ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान लेन-देन की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
कमीशन पर बैंक खाते और सिम उपलब्ध कराने का आरोप
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम सबसे पहले राजन साकेत के बैंक खाते में पहुंची थी। पूछताछ के दौरान उसने अन्य आरोपियों के नाम बताए। इसके बाद पुलिस ने श्रीकांत और विनोद को गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों विभिन्न लोगों से बैंक खाते और सिम कार्ड लेकर उन्हें साइबर गिरोहों को कमीशन पर उपलब्ध कराते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
अन्य राज्यों से जुड़े नेटवर्क की तलाश जारी
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में इस मामले के तार बिहार और मध्यप्रदेश के रीवा क्षेत्र में सक्रिय साइबर गिरोहों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। अब संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय कर अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने और साइबर ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों व डिजिटल माध्यमों की जांच जारी है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।