CJP प्रदर्शन में पत्रकारों पर हमला, प्रियंका चतुर्वेदी ने जताई नाराजगी; बोलीं- ‘माइक हाथ में होने की सजा नहीं मिलनी चाहिए’
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान कुछ पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी की घटनाओं ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सिर्फ पत्रकार होने की वजह से किसी के साथ हिंसा करना अस्वीकार्य है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की टिप्पणी पर भी सवाल उठाते हुए सरकार की संवेदनशीलता पर निशाना साधा।
प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों से कथित मारपीट पर उठा विवाद
दिल्ली में चल रहे CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ मीडिया कर्मियों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट की घटनाएं सामने आईं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ रिपोर्टर प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच घिरे दिखाई दिए। घटना के बाद पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। कई राजनीतिक नेताओं और मीडिया जगत से जुड़े लोगों ने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। घटना को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जबकि वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- पत्रकारों के साथ हिंसा अस्वीकार्य
शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए पत्रकारों के साथ हुई कथित बदसलूकी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार केवल अपना पेशेवर दायित्व निभा रहे होते हैं और उनके हाथ में माइक होने की वजह से उन्हें निशाना बनाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में मीडिया कर्मियों पर हमला लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और ऐसी घटनाओं की जितनी निंदा की जाए, वह कम है।
शिक्षा मंत्री की टिप्पणी पर भी साधा निशाना
पत्रकारों पर हुई कथित हिंसा पर प्रतिक्रिया देने के साथ-साथ प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों और मौजूदा हालात को लेकर सरकार को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उनके अनुसार, गंभीर मुद्दों पर संवाद और समाधान की आवश्यकता है, जबकि राजनीतिक बयानबाजी से हालात और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि सरकार की ओर से छात्रों के मुद्दों पर चर्चा और समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पहले ही दोहराई जा चुकी है।
पत्रकारों की सुरक्षा पर उठी नई बहस
घटना के बाद कई पत्रकारों और मीडिया से जुड़े लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। वरिष्ठ पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने कहा कि रिपोर्टर केवल घटनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने का काम करते हैं, इसलिए उन्हें किसी भी विवाद का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि भीड़ और प्रदर्शनकारी मीडिया कर्मियों तथा संपादकीय निर्णयों के बीच अंतर समझें। इस घटना ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया की स्वतंत्र भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।