सीजेपी ने आंदोलन तेज करने का किया ऐलान, मांगें पूरी नहीं होने पर बड़े प्रदर्शन की चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि हालिया प्रदर्शन केवल शुरुआत थी और भविष्य में बड़ी संख्या में लोग आंदोलन में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ये दावे और बयान सीजेपी की ओर से दिए गए हैं, जिन पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सीजेपी ने आंदोलन को बताया शांतिपूर्ण
राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि संगठन का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को हिंसक बताने की कोशिश की जा रही है, जबकि उनके अनुसार प्रदर्शन के दौरान हालात पुलिस कार्रवाई के बाद बिगड़े। रांका ने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोग लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं और संविधान व लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर अपनी बात रख रहे हैं।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा और बड़ा
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में युवा और समर्थक राजधानी दिल्ली पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। रांका ने कहा कि संगठन पीछे हटने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेगा और अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखेगा।
एफआईआर वापस लेने की रखी मांग
आशुतोष रांका ने कहा कि संगठन की प्रमुख मांगों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना भी शामिल है। उनके अनुसार, आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जानी चाहिए और भविष्य में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक इन मांगों पर निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यह संगठन की ओर से रखा गया पक्ष है।
सभी दलों से समर्थन की अपील
सीजेपी ने विभिन्न राजनीतिक दलों से अपने आंदोलन का समर्थन करने की अपील भी की। रांका ने कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि युवाओं और शिक्षा से जुड़े सवालों का विषय है। उन्होंने कहा कि जो भी दल आंदोलन की मांगों का समर्थन करना चाहता है, उसका स्वागत है। संगठन का दावा है कि उसका उद्देश्य विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना है।
20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
गौरतलब है कि 20 जुलाई को आयोजित “संसद चलो” मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग के आरोप लगाए। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं। मामले को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं।