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डॉक्टरों पर हमले के आरोपी शिवसेना कॉर्पोरेटर की जमानत रद्द, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरेंडर का दिया आदेश

डोंबिवली के एक अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर कथित हमले के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द करते हुए उन्हें निर्धारित समय तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा जमानत देते समय आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड पर पर्याप्त विचार न किए जाने पर भी सवाल उठाए।

हाई कोर्ट ने जमानत रद्द कर सरेंडर का आदेश दिया

बॉम्बे हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम आंखड़ की खंडपीठ ने विशेष सुनवाई के दौरान रमेश म्हात्रे को दी गई जमानत रद्द कर दी। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी रविवार शाम 5 बजे तक संबंधित अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करे। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने जमानत देते समय आरोपी के आपराधिक इतिहास का समुचित मूल्यांकन नहीं किया। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, आरोपी के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिन पर विचार किया जाना आवश्यक था।

निचली अदालत के फैसले पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर राहत नहीं दी जा सकती कि आरोपी कुछ मामलों में बरी हो चुका है। अदालत के अनुसार, किसी भी जमानत याचिका पर फैसला करते समय आरोपी के समग्र आपराधिक रिकॉर्ड और आरोपों की गंभीरता का मूल्यांकन जरूरी होता है। इसी आधार पर कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा दी गई जमानत को निरस्त कर दिया और मामले में कड़ा रुख अपनाया।

डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन का भी हुआ जिक्र

घटना के विरोध में महाराष्ट्र के सरकारी और नगर निगम अस्पतालों के डॉक्टरों ने 22 जुलाई को राज्यव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया है, हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने डॉक्टरों से मानवता और मरीजों के हित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील भी की।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला 6 जुलाई का है, जब ठाणे जिले के डोंबिवली स्थित एक अस्पताल में नवजात शिशु को दूसरे अस्पताल रेफर किए जाने के बाद विवाद हो गया था। आरोप है कि रमेश म्हात्रे अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट की। घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें अस्पताल परिसर में कथित तौर पर हंगामा और धक्का-मुक्की दिखाई दी। पुलिस ने मामले में 8 जुलाई को रमेश म्हात्रे को गिरफ्तार किया था, जबकि 14 जुलाई को उन्हें मजिस्ट्रेट अदालत से जमानत मिल गई थी।

मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी चर्चा तेज

इस प्रकरण ने डॉक्टरों की सुरक्षा और अस्पतालों में हिंसा जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद मामले ने फिर से राजनीतिक और कानूनी महत्व हासिल कर लिया है। अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया के तहत मामले की सुनवाई जारी रहेगी, जबकि डॉक्टर संगठनों और प्रशासन की नजर भी इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।

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