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जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण नोटिस पर AIMIM का विरोध, वाराणसी में प्रदर्शन

रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 48 भवनों को ध्वस्त करने के लिए जारी नोटिस के विरोध में एआईएमआईएम ने वाराणसी में प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताते हुए राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और ध्वस्तीकरण प्रक्रिया रोकने की मांग की।

48 भवनों के नोटिस के खिलाफ सड़क पर उतरी AIMIM

रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों पर ध्वस्तीकरण नोटिस जारी होने के बाद राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी में प्रदर्शन किया। पार्टी के महानगर अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी के नेतृत्व में कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि विश्वविद्यालय के भवनों पर की जा रही कार्रवाई को तत्काल रोका जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

‘बच्चों के भविष्य से ना हो खिलवाड़’

एआईएमआईएम नेताओं ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय एक बड़ा शैक्षणिक संस्थान है, जहां हजारों विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पार्टी महानगर अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों बाद भवनों को अवैध घोषित कर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षा से जुड़े संस्थानों के मामलों में संवेदनशीलता बरती जाए और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।

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नोटिस को बताया अनुचित, कानूनी समाधान की मांग

AIMIM नेताओं ने रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना और भवन निर्माण के समय संबंधित क्षेत्र प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं था। पार्टी ने कहा कि यदि निर्माण से जुड़ी कोई तकनीकी या प्रशासनिक कमी है तो उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सीधे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से संस्थान और छात्रों को नुकसान पहुंच सकता है।

राज्यपाल से कार्रवाई रोकने की मांग

प्रदर्शन के दौरान सौंपे गए ज्ञापन में राज्यपाल से मांग की गई कि जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ जारी ध्वस्तीकरण नोटिस वापस लिया जाए और शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाली किसी भी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। AIMIM नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय को शिक्षा के केंद्र के रूप में देखा जाना चाहिए और किसी भी निर्णय में छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

मांगें नहीं मानी तो प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी

एआईएमआईएम ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सरकार और प्रशासन ने विचार नहीं किया तो पार्टी प्रदेश स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगी। पार्टी नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन, जनजागरूकता अभियान और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए जाएंगे। वहीं, पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

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