गोरखपुर में जलभराव पर अखिलेश यादव का योगी सरकार पर हमला, स्मार्ट सिटी फंड का मांगा हिसाब
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जलभराव और बदहाल सड़कों को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शहर की तस्वीरें साझा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने स्मार्ट सिटी परियोजना पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठाए और प्रभावित लोगों, किसानों तथा व्यापारियों को मुआवजा देने की मांग की।
स्मार्ट सिटी परियोजना पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि गोरखपुर की मौजूदा स्थिति विकास के दावों की वास्तविक तस्वीर पेश कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि स्मार्ट सिटी के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये आखिर कहां खर्च हुए। उनके अनुसार, यदि शहर में जलभराव और सड़कों की ऐसी हालत है, तो विकास परियोजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जलभराव प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे की मांग
सपा प्रमुख ने कहा कि लगातार जलभराव से आम लोगों का जनजीवन और व्यापार दोनों प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित परिवारों और व्यापारियों को बिना किसी भेदभाव के उचित मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही राहत शिविर, स्वच्छ पेयजल, भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की।
किसानों की फसल नुकसान पर भी उठाई आवाज
अखिलेश यादव ने जलभराव से प्रभावित किसानों के लिए भी मुआवजे की मांग की। उनका कहना है कि खेतों में पानी भरने से फसलों को भारी नुकसान हुआ है, इसलिए नुकसान का आकलन कर किसानों को समय पर आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था तेजी से करनी चाहिए।
संक्रमण रोकने के लिए सफाई अभियान की मांग
सपा अध्यक्ष ने जलभराव के बाद संक्रामक बीमारियों के खतरे का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकार से प्रभावित इलाकों में युद्ध स्तर पर सफाई अभियान चलाने, जल निकासी सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की मांग की, ताकि लोगों को बीमारियों से बचाया जा सके।
‘स्मार्ट सिटी नहीं, जलनगरी’ वाला तंज
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि यदि गोरखपुर में यही हालात बने रहे तो शहर को “स्मार्ट सिटी” नहीं बल्कि “जलनगरी” कहा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद की ऐसी स्थिति विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। साथ ही उन्होंने पूछा कि जो लोग पहले प्रशासन और एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराते थे, वे अब इस स्थिति पर चुप क्यों हैं।