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सोनम वांगचुक के अस्पताल जाने पर सियासत तेज, मदन राठौड़ ने विपक्ष पर साधा निशाना

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इसे मानवीय और संवैधानिक जिम्मेदारी बताया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की जिंदगी बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता होती है और स्वास्थ्य से जुड़े मामले पर राजनीति करना उचित नहीं है। राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।

वांगचुक की तबीयत को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद

सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद देश की राजनीति में बहस शुरू हो गई है। विपक्षी दल सरकार की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा इसे स्वास्थ्य और मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया फैसला बता रही है। इस पूरे मामले को लेकर राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि किसी भी व्यक्ति का जीवन सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आंदोलन और मांगों पर चर्चा लोकतांत्रिक तरीके से हो सकती है, लेकिन स्वास्थ्य संकट के समय प्राथमिकता इलाज होना चाहिए।

सरकार की जिम्मेदारी जीवन बचाना: मदन राठौड़

मदन राठौड़ ने कहा कि सरकार की पहली जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति की हालत बिगड़ती है तो उसे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन का कर्तव्य है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाना इसी जिम्मेदारी का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर समय पर इलाज नहीं कराया जाता और कोई अप्रिय घटना हो जाती तो वही लोग सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते।

विपक्ष पर लगाया राजनीति करने का आरोप

भाजपा नेता मदन राठौड़ ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी की जिंदगी से जुड़े मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और फैसलों का विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य को लेकर राजनीति करना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर कदम उठाया है।

अनशन और स्वास्थ्य को लेकर दी प्रतिक्रिया

मदन राठौड़ ने आमरण अनशन जैसे कदमों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले लेने से पहले व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य और उसके संभावित परिणामों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। लंबे समय तक अनशन करने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने दोहराया कि मांगों और मुद्दों पर बातचीत की जा सकती है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में जीवन की सुरक्षा सबसे अहम है।

मुद्दा बना राजनीतिक बहस का केंद्र

सोनम वांगचुक से जुड़ा मामला अब स्वास्थ्य से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस और विपक्ष सरकार के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा इसे संवैधानिक दायित्व और मानवीय पहल बता रही है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजस्थान और राष्ट्रीय राजनीति में और चर्चा का केंद्र बन सकता है।

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