जोधपुर उम्मेद अस्पताल में फिर बिगड़ी 5 प्रसूताओं की हालत, एक वेंटिलेटर पर; जांच के घेरे में व्यवस्था
जोधपुर के उम्मेद महिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। इनमें तीन महिलाएं आईसीयू में भर्ती हैं, जबकि एक को वेंटिलेटर पर रखा गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सभी महिलाएं अलग-अलग अस्पतालों से रेफर होकर आई थीं और ज्यादा रक्तस्राव के कारण उनकी हालत गंभीर हुई। वहीं, पिछले एक महीने में ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर 13 पहुंचने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
दो दिन में पांच प्रसूताएं पहुंचीं गंभीर हालत में
जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में पिछले दो दिनों में पांच प्रसूताओं को गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. मोहन मकवाना के अनुसार, सभी महिलाएं अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होकर आई थीं। इनमें से चार को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा, जबकि एक महिला की स्थिति गंभीर होने पर उसे वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, सभी मरीजों को समान चिकित्सा सुविधा और दवाएं दी जा रही हैं।
ब्लड लॉस को बताया गया हालत बिगड़ने का कारण
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव होने के कारण इन महिलाओं की स्थिति खराब हुई। समय पर बेहतर इलाज के लिए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र उम्मेद अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल दवाओं या इलाज की प्रक्रिया को लेकर कोई संदेह नहीं है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ जांच भी कराई जा सकती है।
अलग-अलग जिलों से रेफर होकर आईं प्रसूताएं
अस्पताल में भर्ती महिलाओं में सरोज को ओसियां से रेफर किया गया, जिनकी स्थिति गंभीर होने पर वेंटिलेटर पर रखा गया है। रेखा को पाली के निजी अस्पताल से ब्लीडिंग और हेल्प सिंड्रोम की शिकायत के बाद भेजा गया। पूजा को शेरगढ़ से ज्यादा रक्तस्राव के कारण रेफर किया गया। वहीं नागौर की रोशनी और जैतारण की बज्जू को भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उम्मेद अस्पताल लाया गया।
एक महीने में 13 प्रसूताओं की बिगड़ी तबीयत
उम्मेद अस्पताल में यह पहला मामला नहीं है। पिछले एक महीने में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 13 प्रसूताओं की हालत बिगड़ने के मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले 20 जून को जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में भी आठ प्रसूताओं की तबीयत खराब हुई थी। हालांकि जांच के बाद अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन, दवाओं और अन्य व्यवस्थाओं को सामान्य बताया था।
गलत ब्लड चढ़ाने का मामला भी आया था सामने
इससे पहले उम्मेद अस्पताल में एक प्रसूता को गलत रक्त चढ़ाने का मामला सामने आया था। धापू नाम की महिला को ओ पॉजिटिव की जगह बी पॉजिटिव रक्त चढ़ा दिया गया था। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और किडनी में संक्रमण की शिकायत के चलते उसे दूसरे अस्पताल में रेफर करना पड़ा। इस मामले में जांच कमेटी ने भी लापरवाही की बात सामने रखी थी।
जांच रिपोर्ट में स्टाफ की लापरवाही का उल्लेख
गलत रक्त चढ़ाने के मामले में गठित जांच कमेटी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में बिना क्रॉस चेक किए रक्त चढ़ाने की बात सामने आई थी। इसमें रेजिडेंट डॉक्टरों, लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। अब संबंधित कर्मचारियों को नोटिस देने की तैयारी की जा रही है।
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