राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: जेल परिसर में होगी दो सजायाफ्ता कैदियों की शादी
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम और मानवीय फैसला सुनाते हुए हत्या के अलग-अलग मामलों में सजा काट रहे दो सजायाफ्ता कैदियों को जेल परिसर में विवाह करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि यदि दो बालिग अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह करना चाहते हैं, तो यह संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत उनके मौलिक अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट के इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईकोर्ट पहुंचे थे दोनों कैदी
यह मामला जोधपुर के मंडोर स्थित ओपन एयर कैंप से जुड़ा है। यहां सजा काट रहे बंदी मुलाराम ने विवाह की अनुमति के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस महिला सीमा से वह विवाह करना चाहता है, वह भी हत्या के एक मामले में सजायाफ्ता है और फिलहाल पैरोल पर बाहर है। दोनों ने अदालत को बताया कि वे अपनी स्वेच्छा से विवाह करना चाहते हैं और इसे अपने जीवन की नई शुरुआत के रूप में देखते हैं।
कोर्ट ने अनुच्छेद-21 का दिया हवाला
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि विवाह का अधिकार व्यक्ति के जीवन, गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने माना कि दो बालिग व्यक्तियों को अपनी इच्छा से विवाह करने का अधिकार प्राप्त है। साथ ही कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी नियमों और सुरक्षा व्यवस्था का पालन करते हुए विवाह समारोह संपन्न कराया जाए।
सरकार ने भी नहीं जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दोनों पक्ष अपनी स्वेच्छा से विवाह करना चाहते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ओपन एयर कैंप के नियमों के तहत विवाह कराने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, मुलाराम नागौर जिले का निवासी है और वर्ष 2023 में हत्या व अन्य मामलों में दोषी ठहराया गया था। अच्छे आचरण के आधार पर उसे ओपन एयर कैंप में रखा गया है। वहीं सीमा भी हत्या के मामले में सजा काट रही है और फिलहाल पैरोल पर है।
शादी में शामिल हो सकेंगे दोनों पक्षों के 21-21 लोग
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विवाह समारोह में दोनों पक्षों की ओर से अधिकतम 21-21 परिजन और एक पुजारी शामिल हो सकेंगे। यदि विशेष परिस्थितियां हों तो जेल प्रशासन अतिरिक्त लोगों को भी अनुमति दे सकता है। विवाह की तिथि पहले से प्रशासन को बतानी होगी और पूरे समारोह के दौरान सुरक्षा, अनुशासन तथा ओपन एयर कैंप के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। शादी का पूरा खर्च दोनों पक्ष स्वयं वहन करेंगे।