ब्रिटिश शासन पर सुयेला ब्रेवरमैन के बयान से विवाद, पवन खेड़ा बोले- ‘औपनिवेशिक राज विकास नहीं, शोषण की विरासत था’
ब्रिटेन की सांसद और पूर्व गृह मंत्री सुयेला ब्रेवरमैन के औपनिवेशिक शासन पर दिए गए बयान को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ब्रेवरमैन ने कहा कि ब्रिटेन के पूर्व उपनिवेशों को ब्रिटिश साम्राज्य का आभारी होना चाहिए क्योंकि उसने वहां निवेश और विकास किया। इस पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन विकास नहीं, बल्कि आर्थिक शोषण, संसाधनों की लूट और करोड़ों लोगों की पीड़ा का प्रतीक था।
सुयेला ब्रेवरमैन के बयान पर कांग्रेस का विरोध
ब्रिटिश सांसद सुयेला ब्रेवरमैन के बयान के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उपनिवेशवाद को विकास का नाम देना इतिहास के तथ्यों और नैतिक मूल्यों दोनों के खिलाफ है। खेड़ा के अनुसार, भारत समेत कई देशों ने ब्रिटिश शासन के दौरान आर्थिक, सामाजिक और मानवीय स्तर पर भारी नुकसान झेला, इसलिए उस दौर को विकास की कहानी के रूप में पेश करना वास्तविक इतिहास से मुंह मोड़ने जैसा है।
‘साम्राज्यवादी सोच इतिहास की सच्चाई नहीं बदल सकती’
पवन खेड़ा ने कहा कि इतिहास का मूल्यांकन तथ्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि साम्राज्यवादी सोच के नजरिए से। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्रिटिश शासन के दौरान उपनिवेशों के संसाधनों का व्यापक दोहन हुआ और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को कमजोर किया गया। उनके मुताबिक, औपनिवेशिक शासन को सकारात्मक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना उन करोड़ों लोगों के संघर्ष और पीड़ा को नजरअंदाज करना है, जिन्होंने उस दौर की कठिनाइयों को झेला।
ब्रिटिश साम्राज्य पर लेख में उठाए कई सवाल
पवन खेड़ा ने अपने लेख ‘Britain Must Stop Whitewashing the Empire’ का हवाला देते हुए कहा कि ब्रिटेन लंबे समय से अपने औपनिवेशिक इतिहास को विकास और निवेश की कहानी के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। उन्होंने दावा किया कि ब्रिटिश शासन से पहले भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता था, लेकिन स्वतंत्रता तक यह हिस्सा काफी कम हो गया। उनके अनुसार, ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश शासन की नीतियों ने भारत की अर्थव्यवस्था, उद्योग और व्यापार को गहरा नुकसान पहुंचाया।
‘रेलवे और बंदरगाह विकास नहीं, साम्राज्य के हितों के साधन थे’
खेड़ा ने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान बने रेलवे, बंदरगाह और प्रशासनिक ढांचे को अक्सर विकास की उपलब्धि बताया जाता है, जबकि उनका प्रमुख उद्देश्य संसाधनों का परिवहन, सैनिकों की आवाजाही और साम्राज्य पर नियंत्रण बनाए रखना था। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को केवल आधुनिक विकास का प्रतीक बताना अधूरा दृष्टिकोण है, क्योंकि इनके पीछे औपनिवेशिक हित प्रमुख थे।
माफी और ऐतिहासिक जवाबदेही की उठाई मांग
कांग्रेस नेता ने ब्रिटेन से अपने औपनिवेशिक अतीत को स्वीकार करने, ऐतिहासिक तथ्यों को पारदर्शी तरीके से प्रस्तुत करने और लूटी गई सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी पर विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इतिहास के साथ न्याय तभी संभव है, जब अतीत की घटनाओं को निष्पक्षता से स्वीकार किया जाए और उन्हें महिमामंडित करने के बजाय तथ्यों के आधार पर समझा जाए।
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