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मोदी कैबिनेट का वाराणसी को बड़ा तोहफा, गंगा-वरुणा किनारे बनेंगे एलीवेटेड कॉरिडोर, ₹25 हजार करोड़ से बदलेगी शहर की तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में वाराणसी के विकास को नई गति देने वाले दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। करीब 25,445.96 करोड़ रुपये की लागत से गंगा और वरुणा नदी के किनारे एलीवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से ट्रैफिक जाम में बड़ी राहत मिलेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और धार्मिक नगरी वाराणसी की कनेक्टिविटी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।

गंगा और वरुणा किनारे बनेंगे आधुनिक एलीवेटेड कॉरिडोर

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि वाराणसी के लिए दो बड़ी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें वरुणा नदी के किनारे लगभग 10,998 करोड़ रुपये की लागत से 4/6 लेन एलीवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जबकि गंगा नदी के समानांतर करीब 14,448 करोड़ रुपये की लागत से 6 लेन एलीवेटेड कॉरिडोर का निर्माण होगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम और आधुनिक बनाना है।

ट्रैफिक जाम से राहत, पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का मानना है कि दोनों कॉरिडोर बनने के बाद वाराणसी में ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा। शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों, बाजारों और बाहरी क्षेत्रों के बीच यात्रा आसान होगी। इससे श्रद्धालुओं, पर्यटकों, स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर सड़क संपर्क के कारण पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी और स्थानीय व्यापार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना वाराणसी को पूर्वांचल के प्रमुख आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में और मजबूत करेगी।

गंगा कॉरिडोर से घटेगा सफर का समय

प्रस्तावित गंगा एलीवेटेड कॉरिडोर लगभग 46 किलोमीटर लंबा होगा और यह राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा। इस मार्ग के बनने से अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट, नमो घाट और काशी विश्वनाथ धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगी। सरकार के अनुसार, कई प्रमुख मार्गों पर यात्रा का समय लगभग 60 मिनट से घटकर 20 मिनट तक रह सकता है।

तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को भी मिली बड़ी सौगात

कैबिनेट ने देश को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘सेमीकॉन 2.0’ कार्यक्रम को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 62,500 करोड़ रुपये की नई प्रोत्साहन योजना को भी स्वीकृति मिली है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है।

रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मिलेगी नई रफ्तार

कैबिनेट ने रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। पारादीप-हरिदासपुर रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए 2,542 करोड़ रुपये और डांगोआपोसी-राजखरसावां रेल मार्ग पर चौथी लाइन बिछाने के लिए 1,365 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी, यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारु होगा और रेलवे नेटवर्क की दक्षता में सुधार आएगा।

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