सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में उतरीं जीनत अमान, सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील
अभिनेत्री जीनत अमान ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की जारी भूख हड़ताल को लेकर चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में उन्होंने सरकार से अपील की कि स्थिति और गंभीर होने से पहले शांतिपूर्ण संवाद का रास्ता अपनाया जाए। उन्होंने वांगचुक के सामाजिक और शैक्षिक योगदान का उल्लेख करते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकालने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जीनत अमान ने साझा किया भावुक संदेश
जीनत अमान ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सोनम वांगचुक की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि उनके विचार इस समय जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के साथ हैं। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। उन्होंने यह भी लिखा कि यदि वांगचुक बातचीत की मांग कर रहे हैं, तो सभी पक्षों को संवाद के जरिए समाधान तलाशने का प्रयास करना चाहिए।
सरकार से शांतिपूर्ण बातचीत की अपील
अपने पोस्ट में जीनत अमान ने कहा कि वह सरकार से अनुरोध करती हैं कि मामले पर बातचीत शुरू की जाए। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद सबसे प्रभावी माध्यम है और ऐसे मुद्दों का समाधान बातचीत से निकलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को उन लोगों की बात गंभीरता से सुननी चाहिए, जो सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठा रहे हैं।
सोनम वांगचुक के योगदान का किया उल्लेख
जीनत अमान ने अपने संदेश में सोनम वांगचुक के शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक क्षेत्र में किए गए कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि वांगचुक लद्दाख में शिक्षा सुधार के लिए लंबे समय से कार्य कर रहे हैं और ‘आइस स्तूप’ जैसी पहल के लिए भी जाने जाते हैं। साथ ही उन्होंने उल्लेख किया कि फिल्म ‘3 इडियट्स’ के लोकप्रिय किरदार ‘फुंसुक वांगडू’ की प्रेरणा भी सोनम वांगचुक को माना जाता है।
सेहत को लेकर बढ़ी चिंता, कई हस्तियों ने जताया समर्थन
वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनका वजन कम हुआ है और चिकित्सकीय निगरानी जारी है। इस बीच लेखक, कलाकार और फिल्म जगत से जुड़े कई लोगों ने भी अपील की है कि उनकी सेहत का ध्यान रखा जाए और सभी पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास करें।
आंदोलन बना चर्चा का विषय
जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को लेकर लगातार राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आने वाले दिनों में प्रस्तावित कार्यक्रमों को देखते हुए इस मुद्दे पर लोगों की नजर बनी हुई है। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पक्षों के बीच संवाद की कोई पहल होती है या नहीं।