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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सियासत तेज, प्रियंका चतुर्वेदी ने RSS, BJP और VHP पर साधा निशाना

अयोध्या राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने मामले की सीबीआई जांच न कराए जाने पर सवाल उठाते हुए बीजेपी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) को जिम्मेदार ठहराया। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच कर रही एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए जांच पर सवाल

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यदि चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि यदि किसी प्रकार का राजनीतिक प्रभाव नहीं होता, तो मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से भी कराई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शी जांच आवश्यक है।

RSS, BJP और VHP पर लगाया जिम्मेदारी का आरोप

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने आरोप लगाया कि राम मंदिर ट्रस्ट के संचालन और प्रबंधन से जुड़े लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए किसी भी प्रकार की कथित वित्तीय अनियमितता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी ने दावा किया कि इस मामले में जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता और संबंधित संस्थाओं को जवाब देना चाहिए।

सीपीएम ने भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की

इस मुद्दे पर वाम दलों ने भी सरकार को घेरा है। सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि सभी पक्ष अपनी पारदर्शिता को लेकर आश्वस्त हैं, तो स्वतंत्र जांच से किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी एसआईटी से रिपोर्ट

इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई है। अब अगली सुनवाई में एसआईटी की रिपोर्ट और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

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