नए वोटरों के लिए नियम सख्त: अब माता-पिता का SIR डेटा जरूरी
पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए चुनाव आयोग ने पंजीकरण प्रक्रिया में अहम बदलाव किया है। अब ऑनलाइन फॉर्म-6 भरते समय आवेदकों को अपने माता-पिता से जुड़ी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जानकारी देना अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है, हालांकि इस पर कानूनी बहस भी शुरू हो गई है।
नया नियम क्या है?
चुनाव आयोग ने नये मतदाताओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया को और सख्त बनाते हुए फॉर्म-6 में अतिरिक्त जानकारी अनिवार्य कर दी है। अब जो भी व्यक्ति पहली बार वोटर बनने के लिए आवेदन करेगा, उसे यह बताना होगा कि उसके माता-पिता पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में शामिल थे या नहीं। यह जानकारी दिए बिना ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ सकेगा। आयोग का मानना है कि इस कदम से मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ेगी और फर्जी या डुप्लीकेट एंट्री को रोकने में मदद मिलेगी।
माता-पिता SIR में शामिल होने पर क्या देना होगा?
यदि आवेदक के माता-पिता पहले SIR प्रक्रिया में शामिल रहे हैं, तो फॉर्म-6 में उनसे संबंधित विस्तृत जानकारी भरना अनिवार्य होगा। इसमें उनके विधानसभा क्षेत्र का नाम या नंबर, संबंधित पोलिंग बूथ का पार्ट नंबर और मतदाता सूची में दर्ज क्रमांक शामिल है। यह डेटा देने से चुनाव आयोग को परिवार आधारित सत्यापन में आसानी होगी। साथ ही यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने में मदद करेगी और आवेदक की पहचान की पुष्टि तेजी से हो सकेगी।
अगर SIR में शामिल नहीं थे तो क्या विकल्प है?
ऐसे मामलों में जहां माता-पिता SIR प्रक्रिया का हिस्सा नहीं रहे हैं, आवेदक को फॉर्म में दिए गए विकल्प का चयन करना होगा। इसके साथ ही माता-पिता का नाम और यदि उपलब्ध हो तो उनका EPIC (वोटर आईडी) नंबर दर्ज करना होगा। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए राहत देती है जिनके पास SIR से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इस स्थिति में भी पहचान सत्यापन के लिए आयोग अन्य तरीकों का उपयोग कर सकता है, जिससे आवेदन प्रक्रिया में कुछ अतिरिक्त जांच की संभावना बनी रहती है।
चुनाव आयोग का उद्देश्य क्या है?
चुनाव आयोग का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाना है। इससे नए मतदाताओं की पहचान सत्यापित करने में आसानी होगी और कई मामलों में अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की जरूरत भी कम पड़ सकती है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR प्रक्रिया का मकसद योग्य मतदाताओं को सूची में शामिल करना और मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या विदेशी नागरिकों के नाम हटाना है। इस सुधार से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत होने की उम्मीद है।
नियम पर उठे कानूनी सवाल
नई व्यवस्था लागू होने के बाद कानूनी विशेषज्ञों ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फॉर्म-6 का प्रारूप जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और मतदाता पंजीकरण नियमों के तहत तय होता है। ऐसे में इसमें किसी भी बदलाव के लिए केंद्र सरकार की अधिसूचना और राजपत्र (गजट) में संशोधन आवश्यक होता है। फिलहाल इस तरह का कोई संशोधन सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, जिससे इस नए नियम की वैधता को लेकर बहस तेज हो गई है।
नए वोटरों पर क्या असर पड़ेगा?
इस बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव 18 वर्ष पूरे कर पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं पर पड़ेगा। अब उन्हें आवेदन के समय अपने माता-पिता से जुड़ी SIR जानकारी जुटानी होगी, जो कई मामलों में आसान नहीं हो सकती। खासतौर पर ग्रामीण या कम जानकारी वाले परिवारों के लिए यह प्रक्रिया जटिल हो सकती है। जिन आवेदकों के पास यह जानकारी नहीं होगी, उनके आवेदन की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी, इस पर चुनाव आयोग की ओर से अभी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होने बाकी हैं।