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अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के निधन पर ईरानी मीडिया में जश्न, दोनों देशों के पुराने तनाव ने दी नई बहस को हवा

अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम के निधन के बाद ईरान में राजनीतिक और मीडिया हलकों की प्रतिक्रियाएं चर्चा का विषय बन गई हैं। जहां अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ग्राहम को अनुभवी नेता बताया, वहीं ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने उनकी मृत्यु को ईरान विरोधी राजनीति के एक प्रमुख चेहरे के अंत के रूप में पेश किया।

बीमारी के कारण हुआ लिंडसे ग्राहम का निधन

लिंडसे ग्राहम का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि उनकी मृत्यु बीमारी के कारण हुई। प्रारंभिक चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार, उनकी मौत महाधमनी (एओर्टा) फटने की वजह से हुई। निधन से कुछ समय पहले तक वे सक्रिय राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल थे और हाल ही में यूक्रेन यात्रा से लौटे थे।

ईरानी मीडिया ने दी तीखी प्रतिक्रिया

ग्राहम के निधन के बाद ईरान के कई सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया संस्थानों ने तीखी टिप्पणियां प्रकाशित कीं। कई रिपोर्टों में उन्हें ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाला नेता बताया गया। कुछ टिप्पणीकारों ने उनकी मृत्यु को ईरान विरोधी नीतियों के एक प्रमुख समर्थक के अंत के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि, ये प्रतिक्रियाएं ईरानी मीडिया और विश्लेषकों की राय हैं और इन्हें आधिकारिक सरकारी नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ईरान से टकराव के लिए जाने जाते थे ग्राहम

लिंडसे ग्राहम अमेरिकी राजनीति में अपनी सख्त विदेश नीति के लिए पहचाने जाते थे। वे लंबे समय से ईरान के खिलाफ कठोर प्रतिबंधों और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई के समर्थक रहे। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों पर ईरान की परमाणु और सैन्य नीतियों की आलोचना की थी। इसी वजह से ईरानी राजनीतिक हलकों में उन्हें अमेरिका के सबसे मुखर आलोचकों में गिना जाता था।

इजरायल के प्रबल समर्थक थे अमेरिकी सीनेटर

ग्राहम इजरायल के मजबूत समर्थकों में शामिल थे और मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल साझेदारी के पक्षधर रहे। उन्होंने इजरायल की सुरक्षा को अमेरिकी राष्ट्रीय हितों से जुड़ा बताया था। यही कारण है कि उनके निधन पर इजरायल के शीर्ष नेताओं ने भी गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें दोनों देशों की मित्रता का मजबूत स्तंभ बताया।

ट्रंप के साथ रिश्तों में आया था बदलाव

अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में लिंडसे ग्राहम डोनाल्ड ट्रंप के आलोचक रहे थे। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले उन्होंने ट्रंप की खुलकर आलोचना की थी। हालांकि, समय के साथ दोनों के संबंध मजबूत हुए और ग्राहम ट्रंप के प्रमुख राजनीतिक सहयोगियों में शामिल हो गए। उन्होंने 2024 के चुनाव में भी ट्रंप का समर्थन किया और कई प्रमुख नीतियों का बचाव किया।

विदेश नीति में निभाई अहम भूमिका

साउथ कैरोलाइना से लंबे समय तक सीनेटर रहे ग्राहम अमेरिकी विदेश नीति के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने इराक युद्ध, अफगानिस्तान नीति, यूक्रेन को समर्थन और मध्य पूर्व में अमेरिकी रणनीति जैसे मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। उनके निधन के बाद अमेरिकी राजनीति में विदेश नीति से जुड़े एक प्रभावशाली और मुखर नेता का अध्याय समाप्त हो गया।

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