#हेल्थ न्यूज़

डायबिटीज मरीजों के लिए राहत! भारत में लॉन्च हुआ सप्ताह में एक बार लगने वाला इंसुलिन

डायबिटीज के इलाज में भारत को एक नया विकल्प मिला है। दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने सप्ताह में केवल एक बार लगाए जाने वाले बेसल इंसुलिन Awiqli (Insulin Icodec) को भारतीय बाजार में पेश किया है। यह दवा रोजाना इंसुलिन लेने वाले कुछ मरीजों के लिए इंजेक्शन की संख्या कम कर सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है और इसका इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।

क्या है Awiqli और कैसे करता है काम?

Awiqli (Insulin Icodec) एक लंबे समय तक असर करने वाला बेसल इंसुलिन है, जिसे इस तरह विकसित किया गया है कि इसका प्रभाव पूरे सप्ताह तक बना रहता है। सामान्य बेसल इंसुलिन जहां रोजाना लेना पड़ता है, वहीं इस दवा की केवल सप्ताह में एक बार जरूरत होती है। इससे सालभर में इंसुलिन इंजेक्शन की संख्या काफी कम हो सकती है। यह शरीर में ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, लेकिन यह सभी प्रकार के इंसुलिन का विकल्प नहीं है।

किन मरीजों को मिलेगा सबसे अधिक फायदा?

विशेषज्ञों के अनुसार यह इंसुलिन मुख्य रूप से टाइप-2 डायबिटीज के उन मरीजों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें केवल बेसल इंसुलिन की जरूरत होती है और जिन्हें रोज इंजेक्शन लगाने में परेशानी होती है। मरीज की स्वास्थ्य स्थिति, ब्लड शुगर स्तर, अन्य दवाओं और इंसुलिन की आवश्यकता का मूल्यांकन करने के बाद ही डॉक्टर इस दवा की सलाह देते हैं।

क्या रोजाना इंसुलिन की जरूरत खत्म हो जाएगी?

डॉक्टरों का कहना है कि यह दवा सभी मरीजों के लिए रोजाना इंसुलिन का विकल्प नहीं बन सकती। विशेष रूप से टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को भोजन के समय तेजी से असर करने वाले इंसुलिन की आवश्यकता बनी रहती है। इसलिए इलाज का तरीका मरीज की बीमारी और जरूरत के अनुसार तय किया जाता है।

रिसर्च में क्या सामने आया?

क्लिनिकल ट्रायल ONWARDS-3 में टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि सप्ताह में एक बार दिया जाने वाला Insulin Icodec ब्लड शुगर नियंत्रण (HbA1c) के मामले में रोजाना दिए जाने वाले बेसल इंसुलिन जितना प्रभावी रहा। अन्य वैश्विक अध्ययनों में भी इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा का मूल्यांकन किया गया है।

डॉक्टर की सलाह के बिना न बदलें इलाज

विशेषज्ञों का कहना है कि सप्ताह में एक बार इंसुलिन लगाने से इलाज आसान हो सकता है, लेकिन नियमित ब्लड शुगर जांच और डॉक्टर की निगरानी पहले की तरह जरूरी रहेगी। किसी भी मरीज को अपनी इंसुलिन की खुराक या दवा में बदलाव स्वयं नहीं करना चाहिए। यह नया विकल्प केवल उन्हीं मरीजों के लिए उपयुक्त है, जिनके लिए डॉक्टर इसकी सलाह दें।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *