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मोतियाबिंद के 7 शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, जानिए किन लोगों में रहता है ज्यादा खतरा

क्या आपको धुंधला दिखाई देने लगा है, रात में गाड़ी चलाने में दिक्कत होती है या तेज रोशनी आंखों में चुभने लगी है? कई लोग इन बदलावों को उम्र बढ़ने का सामान्य असर मान लेते हैं, लेकिन ये मोतियाबिंद (कैटरैक्ट) के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच और उपचार से दृष्टि को बेहतर बनाए रखा जा सकता है। आइए जानते हैं मोतियाबिंद के शुरुआती लक्षण, जोखिम कारक और बचाव के आसान उपाय।

क्या है मोतियाबिंद और क्यों होता है?

मोतियाबिंद एक ऐसी आंखों की समस्या है, जिसमें आंख के प्राकृतिक लेंस में धीरे-धीरे धुंधलापन आने लगता है। इसके कारण रोशनी सही तरह से रेटिना तक नहीं पहुंच पाती और देखने की क्षमता प्रभावित होती है। यह समस्या अधिकतर बढ़ती उम्र के साथ देखी जाती है, हालांकि डायबिटीज, आंखों की चोट, लंबे समय तक कुछ दवाओं का सेवन और अन्य कारणों से भी इसका खतरा बढ़ सकता है। शुरुआती चरण में लक्षण हल्के होते हैं, इसलिए नियमित आंखों की जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

मोतियाबिंद के 7 शुरुआती संकेत

मोतियाबिंद की शुरुआत में कई ऐसे संकेत दिखाई देते हैं जिन्हें अक्सर सामान्य मानकर अनदेखा कर दिया जाता है। इनमें लगातार धुंधला या धूमिल दिखाई देना, रात में देखने में कठिनाई होना, तेज रोशनी या वाहन की हेडलाइट से चुभन महसूस होना, एक आंख से देखने पर वस्तु का दोहरा दिखाई देना, चश्मे का नंबर बार-बार बदलने की जरूरत पड़ना, रंगों का फीका या पीला दिखाई देना और पर्याप्त रोशनी के बावजूद पढ़ने या छोटे अक्षर पहचानने में परेशानी होना शामिल हैं। यदि इनमें से कोई लक्षण लगातार बना रहे तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना उचित रहेगा।

किन लोगों में रहता है अधिक खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार, 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में मोतियाबिंद का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति, लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग करने वाले लोग, धूम्रपान करने वाले, लंबे समय तक तेज धूप या पराबैंगनी (UV) किरणों के संपर्क में रहने वाले, आंख में चोट लगने या पहले आंख की सर्जरी करा चुके लोग तथा जिनके परिवार में मोतियाबिंद का इतिहास रहा हो, उनमें भी इस बीमारी का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।

कब डॉक्टर से करानी चाहिए जांच?

यदि आपको लगातार धुंधला दिखाई दे रहा है, रात में देखने में परेशानी हो रही है, तेज रोशनी से असहजता महसूस होती है या बार-बार चश्मे का नंबर बदलवाना पड़ रहा है, तो इसे केवल उम्र का असर मानकर नजरअंदाज न करें। नेत्र रोग विशेषज्ञ (ऑफ्थैल्मोलॉजिस्ट) द्वारा की गई सामान्य आंखों की जांच से भी शुरुआती चरण में मोतियाबिंद की पहचान संभव है। समय पर जांच से उचित इलाज और आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी की योजना बनाई जा सकती है।

क्या मोतियाबिंद से बचाव किया जा सकता है?

हालांकि मोतियाबिंद को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन कुछ स्वस्थ आदतें इसके जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं। नियमित अंतराल पर आंखों की जांच कराना, धूप में UV सुरक्षा वाले सनग्लास पहनना, डायबिटीज को नियंत्रित रखना, धूम्रपान से दूरी बनाना और हरी सब्जियों व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर संतुलित आहार लेना आंखों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही आंखों से जुड़ी किसी भी असामान्य परेशानी को हल्के में न लें।

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