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TMC में बढ़ी सियासी हलचल, भाजपा में शामिल हुए पूर्व सांसद; राज्यसभा और लोकसभा के समीकरणों पर नजर

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सियासी मुकाबला नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। हाल के दिनों में TMC छोड़कर कुछ नेताओं के भाजपा में शामिल होने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। वहीं, राज्यसभा और लोकसभा में संभावित बदलावों को लेकर भी कई दावे और अटकलें सामने आ रही हैं। हालांकि इनमें से कुछ दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन्हें दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पूर्व TMC नेताओं के भाजपा में शामिल होने से बढ़ी राजनीतिक चर्चा

हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़ चुके सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बाड़ाईक के भाजपा में शामिल होने के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने इन नेताओं को आगामी उपचुनावों के लिए उम्मीदवार भी बनाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। दूसरी ओर, TMC इस घटनाक्रम को अपने संगठन पर बड़ा असर नहीं पड़ने देने की कोशिश में जुटी हुई है।

रुक्मिणी मल्लिक के इस्तीफे को लेकर भी चर्चा

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि राज्यसभा सांसद रुक्मिणी मल्लिक ने अपना इस्तीफा ईमेल के माध्यम से राज्यसभा सभापति को भेजा है और जल्द ही व्यक्तिगत रूप से भी सौंप सकती हैं। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि TMC के कुछ अन्य सांसद भी भविष्य में पार्टी छोड़ सकते हैं। हालांकि इन दावों पर संबंधित पक्षों या संसद की ओर से अंतिम आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

‘भालो TMC’ और ‘बुरी TMC’ की राजनीतिक बहस

भाजपा के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने पहले “भालो (अच्छी) TMC” और “बुरी TMC” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा था कि पार्टी उन नेताओं का स्वागत कर सकती है जिनकी सार्वजनिक छवि बेहतर रही हो। इसी संदर्भ में हाल में शामिल हुए नेताओं को भाजपा ने अपवाद बताते हुए अपने साथ जोड़ा। विपक्षी दलों ने इस रुख पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा का कहना है कि प्रत्येक मामले का मूल्यांकन अलग-अलग आधार पर किया जाता है।

राज्यसभा के गणित को लेकर कई दावे

राज्यसभा में सीटों के संभावित बदलाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दावे सामने आए हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि भाजपा इस्तीफों और उपचुनावों के जरिए अपनी संख्या बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि किसी भी दल की वास्तविक संख्या, उपचुनाव के परिणाम और संसद की आधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए संभावित आंकड़ों को अंतिम स्थिति नहीं माना जा सकता।

लोकसभा और विधानसभा को लेकर भी जारी है राजनीतिक संघर्ष

कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि लोकसभा और पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के भीतर अलग-अलग गुटों की गतिविधियां बढ़ी हैं। साथ ही, चुनाव आयोग और लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि इन मामलों पर संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की ओर से अंतिम निर्णय आना बाकी है। ऐसे में राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले समय में बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

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