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जन्मदिन पर तिरंगे में लौटा नौसेना का जवान, झुंझुनूं में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

जन्मदिन पर तिरंगे में लौटा नौसेना जवान, गांव में मातम

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में शुक्रवार का दिन भावनाओं से भरा रहा। भारतीय नौसेना के जवान कुलदीप दिवाच का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव पहुंचा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सबसे मार्मिक बात यह रही कि जिस दिन परिवार उनके 28वें जन्मदिन का इंतजार कर रहा था, उसी दिन उन्हें अंतिम सलामी दी गई। इस दुखद संयोग ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया।

जन्मदिन बना अंतिम विदाई का दिन

झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ क्षेत्र के घरडू गांव निवासी कुलदीप दिवाच भारतीय नौसेना में सेवाएं दे रहे थे। 10 जुलाई को उनका जन्मदिन था, लेकिन नियति ने ऐसा मोड़ लिया कि यह दिन उनके अंतिम संस्कार का दिन बन गया। तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह के गांव पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। पूरे गांव ने अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। जन्मदिन की खुशियां मातम में बदल गईं और हर ओर शोक का माहौल दिखाई दिया।

ड्यूटी पर जाते समय हुआ दर्दनाक हादसा

जानकारी के अनुसार 6 जुलाई की सुबह कुलदीप दिवाच स्कूटी से ड्यूटी के लिए निकल रहे थे। इसी दौरान तेज अंधड़ के कारण सड़क किनारे खड़ा एक विशाल पेड़ अचानक उनके ऊपर गिर पड़ा। हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने लगातार उपचार किया, लेकिन तीन दिन तक जीवन और मौत से संघर्ष करने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया, जहां से सड़क मार्ग से झुंझुनूं पहुंचाया गया।

सैन्य सम्मान के साथ निकली तिरंगा यात्रा

शुक्रवार सुबह सूरजगढ़ से घरडू गांव तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और पूर्व सैनिक मौजूद रहे। भारत माता के जयकारों और देशभक्ति के नारों के बीच कुलदीप को अंतिम विदाई दी गई। गांव पहुंचने के बाद भारतीय नौसेना की ओर से उन्हें सैन्य सम्मान और अंतिम सलामी दी गई। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां हर आंख नम नजर आई।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

कुलदीप दिवाच अपने पीछे माता, पत्नी, डेढ़ वर्षीय बेटी और बड़े भाई सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी और माता गृहिणी हैं, जबकि बड़े भाई भी भारतीय वायुसेना में देश सेवा कर रहे हैं। परिवार लंबे समय से राष्ट्र सेवा की परंपरा से जुड़ा रहा है। कुलदीप की असामयिक मृत्यु से परिवार पर गहरा दुख टूट पड़ा है। गांव के लोगों ने भी परिवार को सांत्वना देते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

झुंझुनूं ने फिर खोया एक और वीर सपूत

हाल के दिनों में झुंझुनूं जिले के लिए यह दूसरा बड़ा सैन्य आघात माना जा रहा है। कुछ दिन पहले ही जिले के एक अन्य जवान की ड्यूटी के दौरान मौत की खबर से लोग उबर नहीं पाए थे कि अब कुलदीप दिवाच के निधन ने पूरे क्षेत्र को फिर गमगीन कर दिया। सैनिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध झुंझुनूं की धरती ने एक बार फिर राष्ट्र सेवा में समर्पित अपना वीर बेटा खो दिया। ग्रामीणों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश के लिए समर्पित ऐसे जवान हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।

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