#पॉलिटिक्स #राज्य-शहर

राजस्थान में OBC घर-घर सर्वे शुरू, रिपोर्ट के बाद ही तय होंगी पंचायत और निकाय चुनाव की तारीखें

राजस्थान में OBC सर्वे शुरू, चुनाव तारीखों पर बड़ा अपडेट

राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। राज्य में आज से ओबीसी वर्ग का व्यापक घर-घर सर्वे शुरू किया गया है, जो चुनावी आरक्षण और समयसीमा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। 10 से 23 जुलाई तक चलने वाला यह सर्वे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कराया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

राज्यव्यापी सर्वे से तय होगी चुनावी दिशा

राजस्थान में पंचायत राज और शहरी निकाय चुनावों का रास्ता अब ओबीसी सर्वे की रिपोर्ट पर निर्भर हो गया है। राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की टीमें प्रदेशभर में घर-घर जाकर ऑनलाइन डेटा एकत्र कर रही हैं। इस सर्वे का उद्देश्य ओबीसी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक स्थिति का वास्तविक आंकलन करना है। यही आंकड़े आगे चलकर स्थानीय निकायों में आरक्षण तय करने का आधार बनेंगे। चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बिना इस प्रक्रिया के चुनाव कराना संभव नहीं है।

ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया के तहत हो रहा सर्वे

यह सर्वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ‘ट्रिपल टेस्ट’ की शर्तों को पूरा करने के लिए कराया जा रहा है। इस प्रक्रिया में ओबीसी समुदाय की वास्तविक जनसंख्या, सामाजिक पिछड़ापन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है। आयोग द्वारा जुटाए गए आंकड़ों का सत्यापन और विश्लेषण कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग आगे की चुनावी रणनीति तय करेंगे, जिससे आरक्षण व्यवस्था कानूनी रूप से मजबूत हो सके।

हर घर पहुंचेगी टीम, जुटाए जाएंगे अहम आंकड़े

सर्वे के लिए नियुक्त प्रगणक और अधिकारी प्रदेश के हर घर तक पहुंचकर डिजिटल माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे। इसमें परिवार की सामाजिक स्थिति, आर्थिक स्तर और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल शामिल होंगे। यह डेटा पूरी तरह ऑनलाइन सिस्टम में अपलोड किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। सर्वे के बाद इन आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया जाएगा और त्रुटियों को सुधारकर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे सरकार को सौंपा जाएगा।

रिपोर्ट के बाद ही शुरू होगी चुनाव प्रक्रिया

राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले ही संकेत दिए हैं कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद चुनाव कराने में कम से कम 90 दिन का समय लगेगा। ऐसे में यदि रिपोर्ट जुलाई के अंत तक भी आ जाती है, तो भी पंचायत और नगर निकाय चुनाव अक्टूबर से पहले कराना मुश्किल माना जा रहा है। इससे साफ है कि चुनाव की तारीखें अब पूरी तरह सर्वे रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर रहेंगी।

सरकार तैयार, लेकिन विपक्ष के सवाल बरकरार

राज्य सरकार का दावा है कि चुनाव से जुड़ी सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जिनमें परिसीमन और वार्ड पुनर्गठन शामिल हैं। वहीं विपक्ष इस देरी को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने अदालत में याचिका दायर कर समय पर चुनाव कराने की मांग की है। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए ट्रिपल टेस्ट पूरा करना जरूरी है, अन्यथा चुनाव कानूनी विवादों में फंस सकते हैं।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *