निज्जर मामले पर सोशल मीडिया बहस तेज, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने अमेरिकी प्रोफेसर के दावे पर उठाए सवाल
कनाडा में खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। इस बार विवाद अमेरिकी प्रोफेसर के एक बयान के बाद सामने आया, जिस पर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। दोनों के बीच हुई यह सार्वजनिक बहस भारत, कनाडा और निज्जर मामले से जुड़े दावों को लेकर चर्चा का विषय बन गई है।
अमेरिकी प्रोफेसर की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
अमेरिका के University at Albany में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्टोफर क्लैरी ने सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी साझा करते हुए दावा किया कि कनाडा के अधिकारियों का बयान मामले से बचने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने इसे एक उदाहरण के तौर पर पेश किया कि किस प्रकार अधिकारी किसी संवेदनशील विषय पर सीधे जवाब देने से बचते हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
कंवल सिब्बल ने उठाए तथ्य आधारित सवाल
प्रोफेसर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा कि यदि जांच एजेंसियों ने व्यापक जांच और कई सर्च वारंट के बाद भी भारत सरकार से जुड़े प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिलने की बात कही है, तो इसे “मुद्दे से बचना” कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जांच एजेंसियों के निष्कर्षों को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए और बिना प्रमाण के राजनीतिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
निज्जर मामला अब भी संवेदनशील विषय
हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा के बीच पहले भी राजनयिक तनाव देखने को मिला है। हालांकि, इस मामले की जांच और उससे जुड़े दावों पर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दृष्टिकोण हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होते हैं। इसलिए किसी भी दावे को आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
कौन हैं कंवल सिब्बल?
कंवल सिब्बल भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। वह 2002-2003 के दौरान भारत के विदेश सचिव रहे और अपने लंबे राजनयिक करियर में रूस, फ्रांस, तुर्की और मिस्र जैसे देशों में भारत के राजदूत की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर उनके विचार अक्सर सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहते हैं।