राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और ट्रस्ट पर हमला, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
अयोध्या स्थित Ram Mandir में दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार और Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Trust पर निशाना साधते हुए पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने, कथित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और प्रधानमंत्री से जवाब देने की मांग की है। वहीं, ट्रस्ट ने दान व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए कदम उठाने की बात कही है।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब
कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण और उद्घाटन के दौरान सरकार ने इसका श्रेय लिया, लेकिन अब दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आने पर जवाबदेही से बचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
शक्तिसिंह गोहिल ने उठाई ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग
दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता Shaktisinh Gohil ने कहा कि मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नए ट्रस्ट में चारों शंकराचार्यों के प्रतिनिधि, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि और संत समाज के सदस्यों को शामिल किया जाए, ताकि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सके। उन्होंने पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की भी मांग की।
दान राशि को लेकर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस ने दावा किया कि कथित विवाद सामने आने से पहले मंदिर में प्रतिदिन दर्ज होने वाली दान राशि और बाद में दर्ज हुई राशि के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। पार्टी का आरोप है कि इससे दान के लेखा-जोखा को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, कांग्रेस ने अपने इस दावे के समर्थन में किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट या स्वतंत्र ऑडिट का हवाला सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किया है। इसलिए इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों का किया जिक्र
कांग्रेस ने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव Champat Rai और ट्रस्टी Anil Mishra के इस्तीफों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता और बढ़ गई है। पार्टी ने मांग की कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच कराई जाए।
ट्रस्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने की कही बात
दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहले ही कहा है कि दान व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार किए जा रहे हैं। ट्रस्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत नई जिम्मेदारियां तय करने और नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय खोज समिति गठित करने की जानकारी दी है। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता है और वित्तीय प्रबंधन को और मजबूत बनाया जाएगा।
राजनीतिक बहस हुई तेज
राम मंदिर दान विवाद अब राजनीतिक विमर्श का प्रमुख विषय बन गया है। कांग्रेस इस मुद्दे को पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़कर सरकार को घेर रही है, जबकि ट्रस्ट अपनी व्यवस्थाओं में सुधार का दावा कर रहा है। इस मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता किसी सक्षम जांच एजेंसी की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।