10 साल बाद मिला इंसाफ: एलपीजी हादसे में मृत महिला के परिवार को 7.6 लाख रुपये मुआवजे का आदेश
महाराष्ट्र के नागपुर में वर्ष 2014 में हुए एलपीजी गैस हादसे के एक दशक बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी को ब्याज सहित मुआवजा देने और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को भी पीड़ित परिवार को अलग से भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने तय अवधि के भीतर पूरी राशि अदा करने के आदेश दिए हैं।
रसोई में गैस रिसाव के बाद हुआ था दर्दनाक हादसा
यह हादसा 23 दिसंबर 2014 को नागपुर में हुआ था। जानकारी के अनुसार, महिला अपने घर की रसोई में खाना बना रही थी। इसी दौरान गैस सिलेंडर बदलते समय गैस रिसाव हुआ और पास में जल रहे दीपक की लौ के संपर्क में आने से आग भड़क गई। आग की चपेट में आने से महिला गंभीर रूप से झुलस गईं, जबकि उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे उनके पति भी घायल हो गए। हादसे में घर का काफी सामान भी नष्ट हो गया।
तीन महीने इलाज के बाद महिला ने तोड़ा दम
हादसे में महिला करीब 54 प्रतिशत तक झुलस गई थीं, जबकि उनके पति भी घायल हुए थे। दोनों का लंबे समय तक अस्पताल में उपचार चला, लेकिन करीब तीन महीने तक जिंदगी से संघर्ष करने के बाद महिला की मौत हो गई। पीड़ित परिवार का कहना था कि इलाज पर लाखों रुपये खर्च हुए और आर्थिक रूप से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद परिवार ने कानूनी रास्ता अपनाकर मुआवजे की मांग की।
उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी और BPCL को दिए निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को दुर्घटना में मृत्यु, उपचार, संपत्ति के नुकसान, मानसिक पीड़ा और कानूनी खर्च सहित कुल लगभग 7 लाख रुपये (ब्याज सहित देय) का भुगतान करने का आदेश दिया। वहीं भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को भी पीड़ित परिवार को 60 हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया। आयोग ने संबंधित स्थानीय गैस वितरक को सेवा में कमी के आरोप से राहत देते हुए उसके खिलाफ दावा स्वीकार नहीं किया।
दस्तावेज, जांच और दावों को लेकर लंबी चली कानूनी प्रक्रिया
पीड़ित परिवार का आरोप था कि हादसे के बाद जांच प्रक्रिया में अपेक्षित गति नहीं रही, जिससे न्याय मिलने में लंबा समय लग गया। दूसरी ओर, सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रखे। बीमा कंपनी ने आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने का मुद्दा उठाया, जबकि गैस वितरक ने हादसे के लिए अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया और निर्धारित समय सीमा में भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।