अखिलेश यादव का बड़ा दावा: ‘चीन ने भारत की सबसे ज्यादा जमीन कब्जाई’, BJP पर भी साधा निशाना
लखनऊ में समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि चीन ने भारत की सबसे अधिक जमीन पर कब्जा किया है और सीमा से जुड़े मामलों पर सरकार की नीति पर सवाल उठाए। साथ ही भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला।
चीन को लेकर अखिलेश यादव का बड़ा बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार चीन से बढ़ते खतरे को लेकर अपनी चिंता जताती रही है। उन्होंने दावा किया कि चीन ने आजादी से पहले और बाद दोनों दौर में भारत की जमीन पर कब्जा किया है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि चीन ने कई बार भारतीय सीमा का उल्लंघन किया, लेकिन केंद्र सरकार इस मुद्दे पर प्रभावी ढंग से जवाब देने में विफल रही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषय पर सरकार को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए।
सीमा विवाद पर सरकार से जवाबदेही की मांग
अखिलेश यादव ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन से जुड़े सीमा विवादों पर सरकार पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं करती। उनका कहना था कि देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि सीमा पर वास्तविक स्थिति क्या है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार की क्या रणनीति है। उन्होंने केंद्र से इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग भी की।
BJP पर भी बोला हमला
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के अलावा अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक यात्रा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा के शुरुआती दौर में समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता की बात की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के शुरुआती नेताओं ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों का उल्लेख कर खुद को लोकतांत्रिक और सेक्युलर मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया था। अखिलेश ने आरोप लगाया कि समय के साथ भाजपा अपने मूल दावों से भटक गई है।
राजनीतिक माहौल में बयान के मायने
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा विवाद और विदेश नीति जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। विपक्ष लगातार सरकार से इन विषयों पर जवाबदेही की मांग करता रहा है, जबकि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में अपने रुख और कदमों का बचाव करती रही है। ऐसे में सपा प्रमुख की टिप्पणी से राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।