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मंदिर की माफी जमीन की कथित बिक्री पर ग्रामीणों का आक्रोश, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

राजस्थान के अलवर जिले की मालाखेड़ा तहसील के ग्राम खरकड़ा में स्थित ठाकुरजी सीतारामजी महाराज मंदिर की माफी भूमि की कथित अवैध बिक्री का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर भूमि का इंतकाल रोकने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।

मंदिर के नाम दर्ज भूमि को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों के अनुसार मंदिर के नाम पर दर्ज विभिन्न खसरा नंबरों की कुल करीब 4.10 हेक्टेयर माफी भूमि वर्षों से धार्मिक उपयोग में रही है। उनका कहना है कि यह भूमि मंदिर की संपत्ति है और इसका उपयोग मंदिर के संचालन, धार्मिक गतिविधियों तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए किया जाता रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भूमि से जुड़े सभी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

पुजारी और राजस्व कर्मियों पर लगाए गंभीर आरोप

ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मंदिर के पुजारी ने कथित रूप से कुछ राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से इस भूमि का नामांतरण अपने पक्ष में करवा लिया। इसके बाद भूमि के कुछ हिस्सों को अन्य लोगों के नाम बेचे जाने का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो संबंधित सभी व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और मामले की जांच होना बाकी है।

मंदिर की आय और धार्मिक गतिविधियों पर पड़ सकता है असर

ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित भूमि से प्राप्त आय का उपयोग मंदिर की गौशाला के संचालन, पुजारियों के भरण-पोषण और धार्मिक गतिविधियों के लिए किया जाता है। उनका दावा है कि वर्तमान में भी भूमि पर मंदिर का कब्जा है। ग्रामीणों के अनुसार कथित अवैध बिक्री की जानकारी सामने आने के बाद गांव में लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और इस मामले को लेकर व्यापक नाराजगी व्याप्त है।

जांच और कार्रवाई की मांग, आंदोलन की दी चेतावनी

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मंदिर की भूमि का इंतकाल तत्काल प्रभाव से रोका जाए, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। ज्ञापन पर गांव के अनेक ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। ग्रामीणों ने कहा है कि यदि प्रशासन जल्द उचित कदम नहीं उठाता है तो वे बड़े स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

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