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अलवर में आशा सहयोगिनियों का प्रदर्शन, मानदेय बढ़ाने और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की उठी मांग

राजस्थान के अलवर जिले में आशा सहयोगिनियों ने मानदेय वृद्धि, राज्य कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं की मांग को लेकर सोमवार को प्रदर्शन किया। शहीद स्मारक से वन मंत्री संजय शर्मा के निवास तक पैदल मार्च निकालकर महिलाओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और मंत्री के निजी सहायक को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से मांगें लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

पैदल मार्च निकालकर सरकार तक पहुंचाई अपनी मांग

आशा सहयोगिनियों ने शहीद स्मारक से संगठित रूप से पैदल मार्च शुरू किया और वन मंत्री संजय शर्मा के निवास तक पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और सम्मानजनक वेतन की मांग को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वर्तमान मानदेय महंगाई के अनुरूप नहीं है और इससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील भी की गई।

कम मानदेय और कार्यभार को लेकर जताई नाराजगी

प्रदर्शन में शामिल आशा सहयोगिनियों का कहना है कि उनसे स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्य कराए जाते हैं, लेकिन इसके अनुपात में मिलने वाला मानदेय बेहद कम है। उनका कहना है कि वर्तमान में मिलने वाला लगभग 4,900 रुपये प्रतिमाह का मानदेय आज की परिस्थितियों में पर्याप्त नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उन्हें कम से कम 24 हजार रुपये का फिक्स मानदेय दिया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवनयापन कर सकें।

दबाव बनाने के आरोप, 30 दिन से जारी है आंदोलन

आशा सहयोगिनियों ने आरोप लगाया कि आंदोलन और हड़ताल के दौरान कुछ अधिकारियों की ओर से उन पर काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि आंदोलन शुरू हुए करीब 30 दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार या प्रशासन की ओर से कोई प्रतिनिधि उनकी समस्याओं पर चर्चा करने नहीं पहुंचा। महिलाओं ने कहा कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और समाधान के लिए जल्द वार्ता शुरू होनी चाहिए।

राज्य कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा की भी मांग

प्रदर्शन के दौरान आशा सहयोगिनियों ने राज्य कर्मचारी का दर्जा देने के साथ-साथ पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि (पीएफ) और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं लागू करने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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