ईरान ने IAEA निरीक्षण से किया इनकार, परमाणु ठिकानों पर सख्त रुख
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को अपने हालिया हमलों से प्रभावित परमाणु ठिकानों तक पहुंच देने से साफ इनकार कर दिया है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि देश का कानून विदेशी निरीक्षकों को इन संवेदनशील स्थलों पर जाने की अनुमति नहीं देता। इस फैसले के बाद ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
IAEA निरीक्षण पर ईरान का सख्त रुख
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह बमबारी से प्रभावित परमाणु ठिकानों का निरीक्षण IAEA को नहीं करने देगा। गालिबाफ के अनुसार, ईरानी संसद और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा बनाए गए कानून के तहत ऐसे स्थलों पर विदेशी निरीक्षकों की पहुंच पूरी तरह प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि निरीक्षकों को केवल उन्हीं परमाणु प्रतिष्ठानों तक सीमित पहुंच दी जाएगी, जिन्हें सुरक्षा परिषद अनुमति देगी। यह फैसला ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सीमित पहुंच और मौजूदा व्यवस्था
ईरान के मुताबिक, IAEA को वर्तमान में केवल दो प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठानों—बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र और तेहरान रिसर्च रिएक्टर—तक ही सीमित पहुंच दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि यह व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी और इसमें किसी भी तरह का विस्तार फिलहाल संभव नहीं है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।
कूटनीति और प्रतिबंधों पर ईरान का दावा
गालिबाफ ने अपने बयान में यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में भाग लेने से ईरान को कुछ आर्थिक राहत मिली है। उनके अनुसार, बातचीत की वजह से कुछ प्रतिबंधों में ढील और कुछ ईरानी संपत्तियों की रिहाई की प्रक्रिया तेज हुई है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि ईरान बातचीत से दूर रहता, तो ऐसे नतीजे हासिल करना संभव नहीं होता। यह बयान ईरान की दोहरी रणनीति—कूटनीति और सख्ती—को दर्शाता है।
सुरक्षा, कूटनीति और राष्ट्रीय एकता पर जोर
ईरानी संसद अध्यक्ष ने कहा कि देश को सैन्य शक्ति और कूटनीति दोनों के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के विरोधी केवल ताकत की भाषा समझते हैं, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत रखना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने देश के भीतर एकता बनाए रखने और आर्थिक समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही। गालिबाफ ने यह भी कहा कि सरकार सभी नागरिकों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे उनकी आस्था या विचार कुछ भी हों।
वैश्विक परमाणु तनाव की पृष्ठभूमि
ईरान का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों के साथ तनाव पहले से ही बना हुआ है। IAEA की पहुंच सीमित किए जाने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ सकती है और भविष्य में नए प्रतिबंध या कूटनीतिक दबाव की संभावना भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक परमाणु निगरानी व्यवस्था को चुनौती दे सकता है।