होर्मुज पर ईरान का सख्त रुख, शुल्क और नियंत्रण की मांग से अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा
कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच हुई तकनीकी वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण और युद्धविराम जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर पूर्ण नियंत्रण और जहाजों से शुल्क वसूली की मांग दोहराई है। साथ ही उसने अपनी जब्त संपत्तियों की वापसी और परमाणु अधिकारों पर किसी भी समझौते से इनकार किया है। इस वार्ता के बीच क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
होर्मुज जलमार्ग पर ईरान का कड़ा दावा
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपने नियंत्रण को लेकर अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है और इसके तहत इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की क्षमता पर जोर दे रहा है। सूत्रों के अनुसार ईरान ने यहां तक कहा है कि यदि आवश्यक हुआ तो वह इस नियंत्रण को लागू करने के लिए बल प्रयोग से भी पीछे नहीं हटेगा। यह रुख वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
दोहा वार्ता और 14-सूत्रीय समझौता
दोहा में चल रही बातचीत पिछले महीने हुए 14-सूत्रीय अंतरिम समझौते पर आधारित है, जिसमें युद्धविराम, होर्मुज को दोबारा खोलने और स्थायी शांति वार्ता शुरू करने जैसे बिंदु शामिल हैं। अमेरिकी प्रतिनिधियों ने कतर के माध्यम से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि ईरान ने संकेत दिया है कि वह किसी भी आगे की बातचीत को तभी आगे बढ़ाएगा जब उसके रणनीतिक हितों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट सहमति बने।
जब्त संपत्ति और आर्थिक मांगें
ईरान ने वार्ता में अपनी जब्त की गई लगभग छह अरब डॉलर की संपत्ति की वापसी को भी प्रमुख शर्त बताया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार यह मुद्दा केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। यदि अंतरिम समझौते का विस्तार नहीं होता, तो ईरान अगस्त के मध्य तक जहाजों पर शुल्क वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है, हालांकि इसकी रूपरेखा अभी स्पष्ट नहीं की गई है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि इस मार्ग पर नियंत्रण या शुल्क व्यवस्था लागू होती है, तो शिपिंग लागत बढ़ सकती है और देरी व जोखिम भी बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ सकता है।
परमाणु अधिकार और क्षेत्रीय तनाव
ईरान ने एक बार फिर अपने परमाणु अधिकारों पर किसी भी तरह के समझौते से इनकार किया है। साथ ही ईरानी संसद के स्पीकर ने कहा कि जब तक अमेरिका द्वारा पहले किए गए समझौतों के वादे पूरे नहीं होते, तब तक आगे की बातचीत संभव नहीं है। यह स्थिति दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को और जटिल बना रही है, खासकर ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में पहले से ही अस्थिरता बनी हुई है।