56 दिन में 20 एनकाउंटर, भरत तिवारी केस के बाद क्यों थम गई बिहार पुलिस की कार्रवाई?
बिहार में अपराध पर सख्ती की नीति के बीच अप्रैल से जून 2026 तक पुलिस ने लगातार एनकाउंटर अभियान चलाया। महज 56 दिनों में 20 पुलिस मुठभेड़ों में चार आरोपियों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। लेकिन 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर के बाद हालात अचानक बदल गए। इस मुठभेड़ को लेकर उठे विवाद, न्यायिक जांच और पुलिस अधिकारियों पर दर्ज एफआईआर के बाद राज्य में एनकाउंटर की रफ्तार पूरी तरह थमती नजर आई। अब यह मामला कानून व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।
अप्रैल से जून तक लगातार चला एनकाउंटर अभियान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यभार संभालने के बाद बिहार पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ आक्रामक अभियान शुरू किया। 22 अप्रैल से 17 जून 2026 के बीच राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 20 पुलिस एनकाउंटर दर्ज किए गए। इस अवधि में चार आरोपियों की मौत हुई, जबकि कई अन्य घायल होकर गिरफ्तार किए गए। पटना, सीवान, भागलपुर, गया, गोपालगंज, नवादा, समस्तीपुर और अन्य जिलों में हुई इन कार्रवाइयों को अपराध नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा माना गया। आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान औसतन हर तीसरे दिन एक पुलिस मुठभेड़ हुई, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद तेज हुई कार्रवाई
एनकाउंटर अभियान के बीच 15 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अपराधियों के लिए या तो जेल है या कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई। साथ ही उन्होंने लोगों से अपराधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने की अपील की। राजनीतिक विश्लेषकों ने इस बयान को अपराध के खिलाफ सरकार के सख्त रुख के संकेत के रूप में देखा। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई और अधिक चर्चा में रही। हालांकि सरकार की ओर से किसी आधिकारिक “एनकाउंटर नीति” की घोषणा नहीं की गई थी।
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर बना बड़ा विवाद
17 जून को भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। घटना को लेकर सवाल उठने लगे और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर बहस शुरू हो गई। तत्कालीन एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि किसी भी एनकाउंटर को उपलब्धि नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मामले में पुलिस स्तर पर लापरवाही की आशंका की जांच की जा रही है। इसके बाद सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई से बदला माहौल
भरत भूषण तिवारी मामले में सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया। इसके साथ ही संबंधित डीएसपी, थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे में भी व्यापक चर्चा पैदा की। इसके बाद राज्य में किसी नए पुलिस एनकाउंटर की सूचना सामने नहीं आई। कई जानकारों का मानना है कि जांच पूरी होने तक पुलिस बेहद सतर्क होकर काम कर रही है, ताकि किसी भी कार्रवाई पर सवाल न उठे और कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।
पूर्व डीजीपी की टिप्पणी से बढ़ी बहस
भरत तिवारी एनकाउंटर पर बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक अभयानंद ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कानून और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी मामले में एनकाउंटर की परिस्थितियों पर सवाल उठते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने अपराध नियंत्रण के लिए कानूनी प्रक्रिया को सबसे प्रभावी माध्यम बताया। इस बयान के बाद पुलिस कार्रवाई, मानवाधिकार और कानून के शासन को लेकर सार्वजनिक बहस और तेज हो गई।
जांच पूरी होने का इंतजार, कई सवाल बाकी
फिलहाल भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच जारी है। जांच एजेंसियां घटनास्थल, पुलिस कार्रवाई, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं। वहीं, 17 जून के बाद राज्य में किसी नए पुलिस एनकाउंटर की सूचना सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि विवादित मुठभेड़ में क्या हुआ था और भविष्य में पुलिस कार्रवाई को लेकर क्या दिशा तय होगी।