रूस-चीन की गुप्त सैन्य ट्रेनिंग से बढ़ी हलचल, जैविक-रासायनिक युद्ध अभ्यास पर उठे सवाल
रूस और चीन के बीच कथित गुप्त सैन्य प्रशिक्षण की खबरों ने वैश्विक रणनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों ने रेडियोलॉजिकल, बायोलॉजिकल और केमिकल (RBC) सुरक्षा से जुड़े विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की भागीदारी बताई जा रही है। हालांकि चीन ने ऐसे किसी प्रशिक्षण से इनकार किया है, लेकिन सामने आए दस्तावेज और दावों ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और यूक्रेन समेत कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
रूस-चीन के संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण का दावा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रूस और चीन ने पिछले वर्ष विशेष सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनका फोकस रेडियोलॉजिकल, जैविक और रासायनिक सुरक्षा पर था। दावा किया गया है कि चीन में आयोजित इन कार्यक्रमों में रूसी सैनिकों और अधिकारियों को आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में संभावित रासायनिक एवं जैविक खतरों से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया। हालांकि बीजिंग ने इन दावों को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन रिपोर्टों में कई दस्तावेजों और तस्वीरों का हवाला दिया गया है।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की भागीदारी का दावा
यूरोपीय अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस प्रशिक्षण को रूस के रक्षा मंत्री की मंजूरी प्राप्त थी। दावा है कि दोनों देशों के कम से कम चार वरिष्ठ जनरलों ने कार्यक्रम में भाग लिया। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि नवंबर में बीजिंग स्थित एक सैन्य केंद्र में तीन सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें रेडियोलॉजिकल, केमिकल और बायोलॉजिकल सुरक्षा से जुड़े अभ्यास कराए गए।
सामने आए दस्तावेजों में क्या दावा किया गया
रिपोर्टों के अनुसार एक कथित रूसी आंतरिक दस्तावेज में अगस्त 2025 के आदेश का उल्लेख है, जिसमें रूसी सैन्य प्रतिनिधिमंडल को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की सुविधाओं में प्रशिक्षण लेने की अनुमति दिए जाने की बात कही गई है। एक अन्य दस्तावेज में प्रशिक्षण के दौरान इस्तेमाल किए गए सिमुलेटर, रासायनिक टोही उपकरण, विकिरण सुरक्षा प्रणाली और प्रशिक्षण मॉड्यूल का भी उल्लेख होने का दावा किया गया है।
यूक्रेन युद्ध से जोड़ा जा रहा प्रशिक्षण
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कुछ रूसी सैनिक बाद में यूक्रेन युद्ध में तैनात किए गए। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये दावे सही हैं, तो इससे रूस और चीन के बीच सैन्य सहयोग के स्तर का संकेत मिलता है। हालांकि इस संबंध में किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी या आधिकारिक जांच से पुष्टि नहीं हुई है।
चीन ने आरोपों से किया इनकार
इन रिपोर्टों के बीच चीन ने किसी भी तरह के गुप्त सैन्य प्रशिक्षण या युद्ध संबंधी सहयोग के आरोपों को खारिज किया है। बीजिंग का कहना है कि उसकी रक्षा गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप हैं। फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन्हें मीडिया रिपोर्टों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही देखा जा रहा है।
वैश्विक सुरक्षा पर क्या पड़ सकता है असर
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस और चीन के बीच इस तरह का सहयोग लगातार बढ़ता है, तो इसका असर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, यूरोप और वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर पड़ सकता है। खासकर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और यूक्रेन जैसे देश इन गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में दोनों देशों के रक्षा सहयोग की दिशा अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।