नेपाल में चीनी विमानों की खरीद पर फिर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
नेपाल में वर्षों पहले खरीदे गए चीनी यात्री विमानों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इस विवादित विमान खरीद की जांच अब तक क्यों नहीं कराई गई। सरकारी एयरलाइन के लिए खरीदे गए छह विमान अपेक्षित रूप से संचालित नहीं हो सके, जिससे नेपाल एयरलाइंस को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब अदालत के हस्तक्षेप के बाद इस पूरे सौदे की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने 26 जून को दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि चीनी विमानों की खरीद और उनसे जुड़े विवादों की अब तक स्वतंत्र जांच क्यों नहीं कराई गई। कोर्ट के इस कदम के बाद वर्षों पुराने विमान सौदे पर फिर से बहस शुरू हो गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सार्वजनिक धन से हुई इस खरीद में जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
छह विमानों से बदलनी थी क्षेत्रीय हवाई सेवा
नेपाल एयरलाइंस ने वर्ष 2014 से 2018 के बीच चीन की वित्तीय सहायता और ऋण व्यवस्था के तहत कुल छह विमान खरीदे थे। इनमें चार 17-सीटर और दो 56-सीटर विमान शामिल थे। इन विमानों का उद्देश्य नेपाल के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में हवाई संपर्क को मजबूत करना था। सरकार को उम्मीद थी कि इससे घरेलू विमानन सेवाओं का विस्तार होगा, लेकिन परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके।
परिचालन लागत बनी बड़ी चुनौती
रिपोर्टों के अनुसार, इन विमानों के रखरखाव, ईंधन खपत और स्पेयर पार्ट्स की लागत काफी अधिक रही। नेपाल एयरलाइंस ने जुलाई 2020 में शेष पांच विमानों का संचालन भी बंद कर दिया। एयरलाइन का कहना था कि इन विमानों को सेवा में बनाए रखना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रहा। इसके बाद विमान लंबे समय तक पार्किंग में खड़े रहे, जिससे रखरखाव और संरक्षण पर भी अतिरिक्त खर्च होता रहा।
बेचने और लीज पर देने की कोशिश भी रही असफल
नेपाल एयरलाइंस ने इन विमानों को लीज पर देने और बेचने के कई प्रयास किए, लेकिन कोई ठोस सफलता नहीं मिली। इसके चलते विमान वर्षों से उपयोग से बाहर पड़े हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इनकी पार्किंग, सुरक्षा और रखरखाव पर लगातार सरकारी संसाधन खर्च हो रहे हैं। इस कारण यह सौदा नेपाल के विमानन क्षेत्र में सबसे चर्चित और विवादित सरकारी खरीदों में शामिल हो गया है।
जांच की मांग ने फिर बढ़ाई राजनीतिक हलचल
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इस विमान खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि यदि जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीद प्रक्रिया में कहीं प्रशासनिक या वित्तीय अनियमितता हुई थी या नहीं। फिलहाल चीन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और सरकार को अदालत में अपना पक्ष रखना है।