मोदी-ट्रंप फोन कॉल के किस्से पर सियासत तेज, कांग्रेस ने साधा निशाना
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक फोन कॉल से जुड़ा किस्सा साझा किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस बयान को आधार बनाकर केंद्र सरकार पर हमला बोला, जबकि अमेरिकी राजदूत ने इसे दोनों नेताओं के मजबूत व्यक्तिगत संबंधों का उदाहरण बताया।
सर्जियो गोर ने साझा किया फोन कॉल का प्रसंग
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (USISPF) के एक कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों को विशेष महत्व देते हैं। उन्होंने बताया कि मियामी में आयोजित एक यूएफसी कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने अचानक प्रधानमंत्री मोदी को फोन करने की इच्छा जताई। गोर के अनुसार, उन्होंने समय का हवाला देते हुए कहा कि भारत में सुबह के छह बजे हैं, लेकिन ट्रंप ने जवाब दिया कि प्रधानमंत्री जाग जाएंगे क्योंकि उनकी कार्यशैली भी वैसी ही है। बाद में यह बातचीत अगले दिन के लिए तय की गई।
कांग्रेस ने उठाए कूटनीतिक रिश्तों पर सवाल
सर्जियो गोर के बयान के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दोनों नेताओं के बीच संबंध वास्तव में समान स्तर के हैं। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका संबंधों को व्यक्तिगत दोस्ती के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता अलग है। उन्होंने कहा कि बराबरी के रिश्तों में इस प्रकार का व्यवहार नहीं होता और इसे दोस्ती बताना उचित नहीं है।
भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर गोर का संदेश
अपने संबोधन में सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के पक्षधर हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों की सरकारें व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। गोर ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच वर्षों से बने व्यक्तिगत संबंधों ने द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती देने में सकारात्मक भूमिका निभाई है।
बयान के बाद राजनीतिक बहस हुई तेज
अमेरिकी राजदूत के बयान के सामने आने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। एक ओर कांग्रेस इसे सरकार की विदेश नीति और नेतृत्व शैली से जोड़कर सवाल उठा रही है, वहीं अमेरिकी पक्ष ने इसे दोनों नेताओं के बीच विश्वास और मजबूत संबंधों का उदाहरण बताया है। फिलहाल इस बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है और यह राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।