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ट्रंप के बयान पर शशि थरूर की प्रतिक्रिया, बोले- रिश्ते नेताओं नहीं, देशों के बीच होते हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत पर हमला होने की स्थिति में अमेरिका उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संतुलित प्रतिक्रिया दी है। थरूर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध किसी एक नेता पर नहीं, बल्कि देशों की दीर्घकालिक नीतियों और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित होते हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को व्यक्तियों से ऊपर बताते हुए संस्थागत सहयोग को अधिक महत्वपूर्ण बताया।

‘व्यक्तियों से नहीं, देशों से बनते हैं रिश्ते’

एक बातचीत के दौरान शशि थरूर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध नेताओं के बजाय देशों के बीच होते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का कार्यकाल सीमित होता है, जबकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग लंबे समय तक जारी रहता है। उनके अनुसार किसी नेता का आश्वासन सकारात्मक संकेत हो सकता है, लेकिन स्थायी संबंधों का आधार नहीं माना जा सकता।

भारत-अमेरिका साझेदारी को बताया अधिक महत्वपूर्ण

थरूर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग, कूटनीतिक रिश्ते और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी जैसे मुद्दे किसी एक व्यक्ति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। उनका मानना है कि दोनों देशों के संबंध संस्थागत स्तर पर मजबूत होने चाहिए, ताकि बदलते राजनीतिक नेतृत्व के बावजूद सहयोग प्रभावित न हो।

क्वाड को लेकर अमेरिका से जताई अपेक्षा

क्वाड (Quad) की भूमिका पर बोलते हुए शशि थरूर ने कहा कि अब अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह अपने सहयोगियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को ठोस कदमों के जरिए प्रदर्शित करे। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक बैठकों से आगे बढ़कर रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा और साझेदारी को नई दिशा मिल सके।

ईरान-अमेरिका वार्ता पर जताई शांति की उम्मीद

ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि किसी भी वार्ता का अंतिम उद्देश्य स्थायी शांति होना चाहिए। उनके अनुसार यदि दोनों पक्ष ऐसे समाधान तक पहुंचते हैं जिससे तनाव कम हो और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्थिरता मिले, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते में दोनों पक्षों की विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय निगरानी की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है असर

थरूर ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया इसकी आर्थिक कीमत चुकाती है। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित होने से भारत सहित कई एशियाई देशों पर भी असर पड़ता है। उनके अनुसार क्षेत्रीय स्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है और इसी कारण शांति के हर प्रयास को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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