लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर विवाद: कांग्रेस का राजनाथ सिंह पर आरोप, विशेषाधिकार हनन की मांग
लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई बहस के बाद सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर सदन को गुमराह करने और शहीद जवानों की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने लोकसभा स्पीकर से उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
कांग्रेस का आरोप: सदन को गुमराह करने का दावा
कांग्रेस का आरोप है कि लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह कहा था कि इस अभियान में कोई भी भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ। पार्टी का कहना है कि बाद में सशस्त्र बलों की ओर से 6 जवानों के शहीद होने की जानकारी सामने आई, जिससे सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस नेताओं के अनुसार यह बयान संसद को गुमराह करने जैसा है और इससे गंभीर संवैधानिक सवाल उत्पन्न होते हैं।
केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर जताई आपत्ति
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि जुलाई 2025 में संसद में दिए गए बयान और बाद में सामने आई जानकारी के बीच विरोधाभास है। वेणुगोपाल ने दावा किया कि यदि यह जानकारी पहले से उपलब्ध थी, तो इसे सदन में साझा न करना गंभीर चूक और गलतबयानी की श्रेणी में आता है। उन्होंने इसे शहीद जवानों और उनके परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता भी बताया।
विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही की मांग
कांग्रेस नेता ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कोई मंत्री सदन में गलत या भ्रामक जानकारी देता है या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाता है, तो यह संसद की गरिमा का उल्लंघन माना जाता है। कांग्रेस ने इसे गंभीर संसदीय मुद्दा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राजनीतिक बयानबाजी से गरमाया मामला
इस मुद्दे पर अब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि शहीद जवानों के बलिदान की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होनी चाहिए थी, जबकि सत्तापक्ष की ओर से इस आरोप पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला संसद से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।