IT और ऑटो शेयरों की कमजोरी से फिसला बाजार, फार्मा स्टॉक्स ने संभाला मोर्चा
भारतीय शेयर बाजार 29 जून 2026 को गिरावट के साथ बंद हुआ, जहां आईटी और ऑटो सेक्टर में दबाव ने बाजार की रफ्तार को धीमा कर दिया। हालांकि फार्मा और कुछ चुनिंदा स्टॉक्स में तेजी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट मिला। दिन के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में बंद हुए और निवेशकों की सतर्कता बढ़ी।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट, निवेशकों की सतर्कता बढ़ी
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 372 अंक यानी 0.48% की गिरावट के साथ 76,728 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 109 अंक यानी 0.46% गिरकर 23,946 पर आ गया। कारोबार के अंत में दोनों प्रमुख इंडेक्स में आधे शेयर हरे और आधे लाल निशान पर रहे, जिससे बाजार में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। निवेशकों ने वैश्विक संकेतों और सेक्टोरल दबाव के चलते सतर्क रुख अपनाया।
आईटी और ऑटो सेक्टर में भारी बिकवाली
आज के कारोबार में आईटी और ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। निफ्टी मिडस्मॉल आईटी और टेलीकॉम इंडेक्स में 2.20% की गिरावट दर्ज की गई। ऑटो सेक्टर में भी 2.08% की कमजोरी रही। महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी और इंडिगो जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इन सेक्टरों में लगातार बिकवाली ने पूरे बाजार के सेंटीमेंट पर नकारात्मक असर डाला।
फार्मा और हेल्थकेयर स्टॉक्स में दिखी मजबूती
बाजार की गिरावट के बीच फार्मा सेक्टर ने मजबूती दिखाई और निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 1.03% की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा हेल्थकेयर और मेटल सेक्टर में भी हल्की बढ़त देखने को मिली। चुनिंदा शेयरों में खरीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में मदद की। इटरनल, ट्रेंट और बीईएल जैसे शेयरों में भी सकारात्मक मूवमेंट देखने को मिला।
कोटक महिंद्रा बैंक में सबसे बड़ी गिरावट
सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इसमें 3.24% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा अन्य प्रमुख शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। वहीं, कुछ चुनिंदा स्टॉक्स में मामूली तेजी रही, लेकिन ओवरऑल सेंटीमेंट सेलिंग प्रेशर का रहा।
भारत बना दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार
गिरावट के बावजूद भारत ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है और यह फिर से दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में गिरावट के चलते उनका मार्केट कैप भारत से नीचे चला गया। भारत का कुल मार्केट कैप अब 5.05 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश की स्थिति और मजबूत हुई है।